रायपुर: छत्तीसगढ़ के एक सीनियर पुलिस अधिकारी ने कहा है कि तेलंगाना में माओवादियों के पोलित ब्यूरो सदस्य देवूजी उर्फ थिप्पिरी तिरुपति और तीन अन्य सीनियर ऑपरेटिव्स का सरेंडर लेफ्ट विंग एक्सट्रीमिज्म यानी उग्रवाद के खिलाफ लड़ाई में एक अहम मोड़ है. बस्तर रेंज के पुलिस इंस्पेक्टर जनरल सुंदरराज पट्टिलिंगम ने मंगलवार को कहा कि माओवादी लीडरशिप स्ट्रक्चर का धीरे-धीरे कमजोर होना संगठन के आखिरकार खत्म होने और दशकों से चल रहे खून-खराबे के खत्म होने की ओर इशारा करता है.
उन्होंने कहा कि चार सीनियर माओवादी कैडर देवूजी, सेंट्रल कमेटी मेंबर मल्ला राजी रेड्डी उर्फ संग्राम, तेलंगाना स्टेट कमेटी सेक्रेटरी बड़े चोक्का राव उर्फ दामोदर और दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी मेंबर गंगन्ना बैन CPI के टॉप हायरार्की में अहम लोग थे और कई दशक अंडरग्राउंड रहे.
पुलिस अधिकारी ने कहा, 'उनका सरेंडर लेफ्ट विंग एक्सट्रीमिज्म के खिलाफ लड़ाई में एक अहम मोड़ है.' उन्होंने कहा कि हिंसा और हथियारबंद लड़ाई छोड़ने का उनका फैसला जमीनी हकीकत में एक बड़ा बदलाव दिखाता है और यह साफ तौर पर मानता है कि हिंसा के लिए जगह कम हो रही है, जबकि शांति और विकास की गुंजाइश बढ़ रही है.
पट्टिलिंगम ने कहा कि बस्तर इलाके में सुरक्षा बलों के लगातार ऑपरेशन जिसकी सीमा तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, ओडिशा और महाराष्ट्र से लगती है, उसके साथ-साथ बेहतर शासन और स्थानीय समुदायों के बीच बढ़ती उम्मीदों ने एक अच्छा माहौल बनाया है. उन्होंने कहा, 'जब इतने सीनियर कैडर तीन से चार दशक अंडरग्राउंड रहने के बाद पीछे हटते हैं, तो यह रैंकों के अंदर इस बढ़ती समझ को दिखाता है कि कट्टरपंथ का रास्ता अपनी हद तक पहुंच गया है.'
उन्होंने आगे कहा, 'आज का विकास और नतीजा देने वाला दोनों है. यह बाकी कैडर को एक मजबूत सिग्नल भेजता है कि आंदोलन में अब वह अधिकार या पक्का इरादा नहीं है जो कभी दिखाया जाता था. साथ ही यह लोगों के भरोसे को मजबूत करता है कि पक्की शांति कोई दूर का लक्ष्य नहीं बल्कि एक उभरती हुई सच्चाई है.'
IGP ने कहा कि बस्तर, एक ऐसा इलाका जिसने सालों तक हिंसा और गड़बड़ी झेली है, अब पक्की स्थिरता की ओर अपनी यात्रा को तेज करने के लिए तैयार है. उन्होंने बाकी बचे कैडर से बदलते हालात को पहचानने और मेनस्ट्रीम में लौटने की अपील की.