Bilaspur Body Incident: तखतपुर क्षेत्र के जुनापारा चौकी अंतर्गत पुलिस की अमानवीय लापरवाही एक बार फिर सामने आई है, जिसने मानवता को शर्मसार कर दिया. सकेरी गांव के निवासी उमाशंकर साहू के शव को उनके परिजनों ने जंगल से बरामद कर बोरी में भर बाइक से अस्पताल पहुंचाया, क्योंकि पुलिस ने न तो वाहन भेजा और न ही कोई सहयोग किया.
उमाशंकर साहू तीन दिन पहले लकड़ी काटने निमघाट जंगल गए थे, जिसके बाद वे लौटे नहीं. परिजनों ने जुनापारा चौकी में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी, लेकिन पुलिस ने न तो कोई खोज अभियान चलाया और न ही इलाके का मुआयना किया. अंततः परिजनों और ग्रामीणों ने स्वयं जंगल में जाकर तलाश की और वहां क्षत-विक्षत शव मिला.
शव की हालत देखकर परिवार के लोग जंगली जानवरों के हमले की आशंका जता रहे हैं. बावजूद इसके, इतने गंभीर मामले में भी पुलिस का रवैया पूरी तरह उदासीन रहा. न शव उठाने के लिए वाहन भेजा गया और न ही कोई जवान मौके पर मौजूद था. यह रवैया न केवल कानून व्यवस्था पर सवाल उठाता है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं की भी अवहेलना करता है.
यह घटना केवल लापरवाही नहीं, इंसानियत की हार है!
— 𝐒𝐮𝐫𝐲𝐚 𝐏𝐫𝐚𝐤𝐚𝐬𝐡 𝐒𝐮𝐫𝐲𝐚𝐤𝐚𝐧𝐭 (@SPsuryakant) May 17, 2025
बिलासपुर पुलिस की शर्मनाक लापरवाही सामने आई है. एक ग्रामीण की लाश तीन दिन बाद जंगल में मिली — पर शव उठाने तक की ज़िम्मेदारी पुलिस ने नहीं ली. परिजन बोरे में भरकर बाइक से शव मर्चुरी तक लाए...#Chhattisgarh #PoliceNegligence pic.twitter.com/U65twIUGOA
मजबूर परिजनों ने शव को बोरी में भरकर बाइक पर लादा और अस्पताल ले गए. इस दृश्य ने हर किसी को विचलित कर दिया. मृतक के पुत्र रोहित साहू और फागुराम साहू ने कहा, 'पुलिस ने हमारे साथ जो किया, वह इंसानियत के खिलाफ है. ऐसे मामलों में संवेदनशीलता की आवश्यकता होती है, लेकिन उन्होंने हमें अकेला छोड़ दिया.'
घटना के बाद ग्रामीणों में गहरा आक्रोश है. सभी ने पुलिस की लापरवाही के खिलाफ आवाज उठाई और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है. ग्रामीणों का कहना है कि यदि पुलिस समय पर सहायता करती तो शायद शव की स्थिति इतनी खराब नहीं होती.