दुर्ग में घातक ASF का कहर! 83 सुअरों को मारकर दफनाया गया, गांव बना कंटेनमेंट जोन
छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में अफ्रीकन स्वाइन फीवर के मामले सामने आने के बाद प्रशासन ने 83 सुअरों को नियमों के तहत मारकर दफना दिया. बीमारी लाइलाज होने के कारण क्षेत्र को कंटेनमेंट जोन घोषित किया गया और सतर्कता बढ़ा दी गई.
दुर्ग: जिले में अफ्रीकन स्वाइन फीवर (ASF) की पुष्टि के बाद प्रशासन अलर्ट मोड पर है. धमधा ब्लॉक के मुड़पार गांव के एक सुअर फार्म में लगातार हो रही मौतों ने विभाग को जांच के लिए मजबूर किया, जिसके बाद संक्रमण की पुष्टि होते ही 83 सुअरों को वैज्ञानिक पद्धति से मारकर दफनाना पड़ा. बीमारी को अत्यंत संक्रामक और लाइलाज माना जाता है, इसलिए क्षेत्र में कड़े एहतियाती कदम उठाए जा रहे हैं और सुअर पालकों को सावधानी बरतने के निर्देश दिए गए हैं.
ASF संक्रमण की पुष्टि और प्रशासन की त्वरित कार्रवाई
मुड़पार गांव के एक निजी सुअर पालक ने पिछले कई दिनों से सुअरों की मौत बढ़ने पर इसकी जानकारी जिला पशुपालन विभाग को दी. विभाग की टीम 2 अप्रैल को मौके पर पहुंची और मृत तथा बीमार सुअरों के नमूने जांच के लिए भोपाल स्थित लैब भेजे. रिपोर्ट आने पर यह स्पष्ट हो गया कि सुअर अफ्रीकन स्वाइन फीवर से संक्रमित हैं. बीमारी की गंभीरता को देखते हुए पशुपालन विभाग ने तुरंत क्षेत्र को प्रतिबंधित घोषित किया और कुल 83 संक्रमित व संदिग्ध सुअरों को मानकों के अनुसार इंजेक्शन देकर मारकर दफनाने की प्रक्रिया पूरी की. यह कदम संक्रमण को आगे फैलने से रोकने के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
बीमारी का खतरा और विशेषज्ञों की चेतावनी
पशु चिकित्सा सेवाओं के उप संचालक डॉ. वसीम शम्स के अनुसार ASF ऐसी बीमारी है जिसका अब तक कोई इलाज या वैक्सीन विकसित नहीं हुई है. यह संक्रमण केवल सुअरों में ही फैलता है और मनुष्यों या अन्य जानवरों के लिए खतरा नहीं होता, लेकिन सुअरों के बीच इसकी रफ्तार बेहद तेज होती है. इसी कारण भारत सरकार ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जहां भी संक्रमण मिले, वहां सभी प्रभावित सुअरों को वैज्ञानिक पद्धति से मारकर नष्ट करना अनिवार्य है. विभाग विशेषज्ञों के साथ मिलकर संक्रमण को रोकने के लिए निरंतर निगरानी कर रहा है.
कंटेनमेंट जोन और सुरक्षा उपाय
रिपोर्ट आने के तुरंत बाद प्रशासन ने फार्म के एक किलोमीटर क्षेत्र को कंटेनमेंट जोन घोषित किया. इस दायरे में सुअरों की आवाजाही, बिक्री तथा नए जानवर लाने पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है. क्षेत्र में नियमित सैनिटाइजेशन, बायोसिक्योरिटी उपाय और टीमों द्वारा निगरानी की जा रही है. आसपास के सुअर पालकों को अलग-अलग दिशानिर्देश दिए गए हैं, जिनमें फार्म को साफ रखने, बाहरी लोगों की एंट्री सीमित करने और बीमार जानवरों की तुरंत सूचना देने पर जोर दिया गया है. प्रशासन का कहना है कि अगले कुछ दिनों तक लगातार मॉनिटरिंग जारी रहेगी.
सुअर पालकों में चिंता, विभाग ने बढ़ाई जागरूकता
ASF के कारण बड़ी संख्या में सुअरों के मारे जाने से स्थानीय पालकों में चिंता बढ़ गई है. विभाग द्वारा उन्हें बीमारी के लक्षण, सुरक्षा उपाय और भविष्य के जोखिमों के बारे में लगातार जागरूक किया जा रहा है. अधिकारियों का कहना है कि हालात अभी नियंत्रण में हैं, लेकिन लापरवाही से संक्रमण फैल सकता है. इसलिए हर गतिविधि पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है. प्रशासन ने साफ किया है कि जब तक क्षेत्र से संक्रमणमुक्त होने की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो जाती, प्रतिबंध जारी रहेंगे. यह कदम स्थानीय पशुधन को सुरक्षित रखने के लिए बेहद आवश्यक माना जा रहा है.