श्रावणी मेले के लिए खास मोबाइल एप होगा लॉन्च, घर बैठे होंगे लाइव दर्शन; जानें क्या है तैयारी?
बिहार में हर साल सावन के महीने में श्रावणी मेले का आयोजन किया जाता है. इस बार सरकार लाखों श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए नगर निगम और स्मार्ट सिटी एक विशेष मोबाइल एप तैयार कर रहे हैं. इस एप के जरिए श्रद्धालुओं को लाइव दर्शन, वर्चुअल पूजा, भीड़ की स्थिति, मेला रूट, पार्किंग, धर्मशाला, चिकित्सा शिविर और आपातकालीन सहायता जैसी कई सुविधाएं आसानी से एक ही मंच पर मिलेंगी.
श्रावणी मेले के दौरान बाबा गरीबनाथ मंदिर में उमड़ने वाली भारी भीड़ को देखते हुए नगर निगम और स्मार्ट सिटी ने श्रद्धालुओं के लिए आधुनिक तकनीक का सहारा लिया है. सावन माह में एक विशेष मोबाइल एप शुरू करने की तैयारी की जा रही है. यह एप एंड्रायड प्लेटफॉर्म पर निशुल्क उपलब्ध होगा और इसका उद्देश्य बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं को सुरक्षित, सुविधाजनक और व्यवस्थित यात्रा का अनुभव देना है.
एप के माध्यम से श्रद्धालु मंदिर तक पहुंचने के लिए सही मार्ग की जानकारी प्राप्त कर सकेंगे. साथ ही उन्हें मेला क्षेत्र की हर जरूरी सूचना एक ही स्थान पर उपलब्ध होगी, जिससे अनावश्यक परेशानी और भीड़भाड़ से बचने में मदद मिलेगी.
लाइव दर्शन से लेकर पार्किंग तक की पूरी जानकारी
मोबाइल एप में कई उपयोगी सुविधाएं जोड़ी जा रही हैं. श्रद्धालु बाबा गरीबनाथ मंदिर के लाइव दर्शन देख सकेंगे और वर्चुअल पूजा का लाभ भी उठा सकेंगे. इसके अलावा मंदिर परिसर में भीड़ की ताजा स्थिति की जानकारी भी मिलेगी, जिससे लोग अपनी यात्रा की बेहतर योजना बना सकेंगे. एप में शिव भजन, मेला रूट, धर्मशालाओं की जानकारी, कांवरिया शिविर, भंडारा स्थल, पार्किंग, होटल, एटीएम, पेयजल, शौचालय, स्नानघर, विश्राम कक्ष और चिकित्सा शिविरों का विवरण भी उपलब्ध रहेगा. इसके साथ ही खोया-पाया केंद्र और आपातकालीन संपर्क नंबर जैसी सुविधाएं भी शामिल होंगी.
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ऑनलाइन क्विज और फोटो प्रतियोगिता भी होगी
श्रद्धालुओं की सहभागिता बढ़ाने के लिए एप में ऑनलाइन क्विज और फोटो प्रतियोगिता का भी आयोजन किया जाएगा. श्रद्धालु मेले से जुड़ी तस्वीरें एप पर अपलोड कर सकेंगे और प्रश्नोत्तरी में हिस्सा ले सकेंगे. बेहतर प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को सम्मानित और पुरस्कृत किया जाएगा. श्रावणी मेले के दौरान बाबा गरीबनाथ मंदिर में बड़ी मात्रा में फूल और बेलपत्र चढ़ाए जाते हैं. विशेष रूप से सोमवारी के दिन तीन टन से अधिक पूजा सामग्री मंदिर से निकलती है. इस बार इन फूलों और बेलपत्र का वैज्ञानिक तरीके से उपयोग करते हुए जैविक खाद तैयार की जाएगी. सफाई विभाग के अनुसार मंदिर से एकत्र किए गए फूल और बेलपत्र को चंदवारा पिट ले जाकर पहले सुखाया जाएगा, जिसके बाद उनसे खाद तैयार की जाएगी. यह व्यवस्था सावन के साथ-साथ वर्षभर लागू रहेगी.