बिहार सरकार में मंत्री और हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा के नेता संतोष कुमार सुमन ने आरक्षण को लेकर ऐसा बयान दिया है, जिसने राज्य की सियासत में नई बहस छेड़ दी है. सुमन का कहना है कि मौजूदा आरक्षण व्यवस्था की समीक्षा जरूरी है, लेकिन इसका मतलब आरक्षण को समाप्त करना बिल्कुल नहीं है. उनके मुताबिक व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए कि आरक्षण का वास्तविक लाभ उन वर्गों तक पहुंचे, जो आज भी सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक रूप से सबसे ज्यादा पिछड़े हुए हैं.
संतोष सुमन ने SC-ST आरक्षण में उप-वर्गीकरण (सब-क्लासिफिकेशन) को लेकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का समर्थन किया है. उन्होंने कहा कि दलित समाज एक समान स्थिति वाला समूह नहीं है. इसके भीतर भी कई जातियों की सामाजिक और आर्थिक स्थिति अलग-अलग है. कुछ जातियों को लंबे समय से आरक्षण का अपेक्षाकृत ज्यादा लाभ मिला है, जबकि कई समुदाय अब भी अवसरों से पीछे हैं. ऐसे में जरूरतमंद और अधिक पिछड़ी जातियों के लिए आरक्षण के भीतर अलग हिस्से पर विचार किया जाना चाहिए.
आरक्षण की समीक्षा का अर्थ आरक्षण समाप्त करना नहीं, बल्कि उसका लाभ सही व्यक्ति तक पहुँचाना है।
— Dr. Santosh Kumar Suman (@santoshmanjhi_) August 27, 2026
हमने SC-ST आरक्षण में उप-वर्गीकरण के सुप्रीम कोर्ट के फैसले का तब भी समर्थन किया था और आज भी करते हैं। आखिर 79 वर्ष की आजादी के बाद यह सवाल पूछना गलत कैसे हो सकता है कि आरक्षण का लाभ…
सुमन ने कहा कि आरक्षण की समीक्षा का अर्थ उसे समाप्त करना नहीं, बल्कि उसका फायदा सही व्यक्ति तक पहुंचाना है. उन्होंने सवाल उठाया कि आजादी के 79 साल बाद यह पूछना गलत कैसे हो सकता है कि आरक्षण का लाभ किन वर्गों को कितना मिला और समाज के सबसे निचले पायदान पर मौजूद कौन-से लोग अब भी इससे वंचित हैं. उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी ने SC-ST आरक्षण में उप-वर्गीकरण के सुप्रीम कोर्ट के फैसले का पहले भी समर्थन किया था और आगे भी करती रहेगी.
संतोष सुमन ने अपने एक्स पोस्ट में कहा कि देश में सामाजिक और आर्थिक पिछड़ेपन को पहचानने के लिए पहले भी अलग-अलग श्रेणियां बनाई गई हैं. सामान्य वर्ग में आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के लिए EWS की व्यवस्था है, जबकि पिछड़े वर्गों में पिछड़ा और अतिपिछड़ा वर्ग अलग-अलग पहचाना गया है. ऐसे में दलित समाज के भीतर भी यह देखना जरूरी है कि आरक्षण का लाभ सबसे वंचित लोगों तक पहुंच रहा है या नहीं.
सुमन के मुताबिक कुछ जातियां लगातार अधिक लाभ ले रही हैं और कुछ अभी भी पीछे हैं तो उन्हें अवसर देने के लिए उप-वर्गीकरण पर विचार होना चाहिए. उन्होंने कहा कि इसका मकसद आरक्षण खत्म करना नहीं, बल्कि बाबा साहब डॉ. आंबेडकर के दिए संवैधानिक अधिकार को उसके वास्तविक हकदारों तक पहुंचाना है. उनके अनुसार आरक्षण बचाना है तो उसकी पहुंच न्यायपूर्ण बनानी होगी और सबसे वंचित तक लाभ पहुंचाना ही सामाजिक न्याय है.