भागलपुर: बिहार के भागलपुर जिले में बुधवार को गंगा नदी में बड़ा हादसा हो गया. कटाव रोधी काम में जुटे 21 मजदूरों को लेकर जा रही नाव अचानक पलट गई. हादसे के बाद मौके पर अफरातफरी मच गई. स्थानीय लोगों और प्रशासन ने तुरंत बचाव अभियान शुरू किया. एसडीआरएफ की टीम ने 19 मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया, लेकिन सिकंदर मंडल और बादल मंडल अब भी लापता हैं. प्रशासन ने घटना के बाद सुरक्षा नियमों को लेकर सख्त कदम उठाए हैं.
नाव हादसा नौगछिया सब-डिविजन के राघोपुर ब्लॉक में हुआ. नाव पर घोघा, इस्माइलपुर और परबत्ता क्षेत्र के मजदूर सवार थे. सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन की टीमें मौके पर पहुंचीं. एसडीआरएफ ने मोटरबोट और लाइफ जैकेट की मदद से बचाव अभियान चलाया. स्थानीय गोताखोरों और ग्रामीणों ने भी तलाश में सहयोग किया. 19 मजदूरों को बचा लिया गया, जबकि दो लापता मजदूरों की खोज लगातार जारी है.
जिला मजिस्ट्रेट अलंकृता पांडे ने दुर्घटना स्थल का निरीक्षण किया. उन्होंने बचाव अभियान के साथ बाढ़ नियंत्रण से जुड़े कामों की भी जानकारी ली. प्रशासन की प्राथमिकता लापता मजदूरों को जल्द तलाशना है. अधिकारियों और बचाव दल को नदी में लगातार निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं. प्रशासन ने घटना के कारणों की भी पड़ताल शुरू कर दी है, ताकि जिम्मेदारी तय की जा सके.
प्रशासन के अनुसार मजदूरों को नाव पर काम करते समय लाइफ जैकेट पहनना जरूरी था. पहले ही संबंधित अधिकारियों को इस नियम का पालन कराने के निर्देश दिए गए थे. हादसे के बाद डीएम ने जल संसाधन विभाग को संबंधित ठेकेदारों और वेंडरों के खिलाफ मामला दर्ज कराने को कहा है. कटाव रोधी काम ठेकेदार राजकुमार सिंह की देखरेख में चल रहा था. प्रशासन अब सुरक्षा व्यवस्था की भी जांच करेगा.
हादसे के बाद भागलपुर प्रशासन ने बाढ़ नियंत्रण कार्यों में सामान पहुंचाने के लिए नावों के इस्तेमाल पर रोक लगा दी है. अब कटाव प्रभावित स्थानों तक जियो-बैग पहुंचाने के लिए ट्रैक्टरों का इस्तेमाल किया जाएगा. अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि नदी किनारे चल रहे सभी कामों में सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन कराया जाए. प्रशासन ने किसी भी तरह की लापरवाही को गंभीरता से लेने की बात कही है.
प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि 18 वर्ष से कम उम्र के किसी व्यक्ति को ऐसे जोखिम वाले काम में नहीं लगाया जाएगा. इंजीनियरों को कटाव रोकने का काम तेज करने के निर्देश मिले हैं. गंगा का जलस्तर अभी भी खतरे के निशान के आसपास बना हुआ है. ऐसे में बचाव और बाढ़ नियंत्रण दोनों कार्यों में अतिरिक्त सावधानी बरतने पर जोर दिया जा रहा है.