बिहार में 'सम्राट' का राजतिलक, बुधवार को सिर्फ दो डिप्टी सीएम के साथ शपथ लेंगे नए सीएम
बिहार में सत्ता परिवर्तन के बाद बुधवार, 15 अप्रैल को सम्राट चौधरी मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे. उनके साथ जदयू के दो वरिष्ठ नेता उपमुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेंगे, जबकि पूर्ण मंत्रिमंडल विस्तार विधानसभा सत्र और मई में चुनावी नतीजों के बाद होने की संभावना है.
पटना: बिहार की राजनीति में एक नए युग का सूत्रपात होने जा रहा है. भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाली नई एनडीए सरकार बुधवार, 15 अप्रैल 2026 को कार्यभार संभालेगी. राज्य के नवनिर्वाचित मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी कल लोकभवन में आयोजित एक सादे समारोह में पद और गोपनीयता की शपथ लेंगे. हालांकि, सियासी गलियारों में कैबिनेट की लंबी सूची को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच बड़ी खबर यह है कि कल केवल तीन नेता ही शपथ लेने जा रहे हैं.
प्रशासनिक तैयारियों और राजनीतिक सूत्रों के मुताबिक, राज्यपाल सैयद अता हसनैन मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के साथ जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के दो वरिष्ठ चेहरों को उपमुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाएंगे. इनमें अनुभवी नेता बिजेंद्र प्रसाद यादव और विजय कुमार चौधरी के नाम शामिल हैं. मंत्रिमंडल का यह बेहद संक्षिप्त स्वरूप हैरान करने वाला जरूर है, लेकिन इसके पीछे गठबंधन के भीतर चल रही गहन मंत्रणा को मुख्य वजह माना जा रहा है. स्वयं विजय कुमार चौधरी ने दो दिन पहले संकेत दिए थे कि अभी मंत्रियों की सूची और विभागों के बंटवारे पर अंतिम सहमति नहीं बनी है.
4 मई के बाद होगा कैबिनेट विस्तार
भाजपा और एनडीए के रणनीतिकारों ने एक सोची-समझी योजना के तहत मंत्रिमंडल विस्तार को फिलहाल टाल दिया है. सूत्रों का कहना है कि सम्राट चौधरी विधानसभा का सत्र बुलाकर पहले अपना बहुमत साबित करेंगे. इसके बाद, 4 मई को पश्चिम बंगाल, असम और अन्य राज्यों के विधानसभा चुनाव के परिणाम आने के बाद ही मंत्रिमंडल को पूर्ण विस्तार दिया जाएगा. इस विस्तार में भाजपा और जदयू के अलावा सहयोगी दलों, चिराग पासवान की लोजपा-रामविलास, जीतनराम मांझी की 'हम' और उपेंद्र कुशवाहा की रालोमो के नेताओं को मंत्री बनाया जाएगा. चर्चा है कि पुराने मंत्रियों में से अधिकांश को दोबारा मौका मिल सकता है.
विभागों की रस्साकशी और स्पीकर का पद
एनडीए के भीतर अब भी मंत्रियों की संख्या और मलाईदार विभागों को लेकर बातचीत का दौर जारी है. भाजपा और जदयू के बीच शुरुआती सहमति बनने के बाद ही छोटे सहयोगी दलों से संवाद किया जाएगा. इसके अलावा, विधानसभा अध्यक्ष के पद को लेकर भी कशमकश की स्थिति है. वर्तमान में इस पद पर भाजपा के प्रेम कुमार आसीन हैं, लेकिन नई सत्ता व्यवस्था में इस पद को लेकर दोनों प्रमुख दलों के बीच 'लेन-देन' की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है.