रेल बजट में बिहार को मिली बड़ी सौगात, पटना से होकर गुजरेगी पहली बुलेट ट्रेन; रेल मंत्री ने किया ऐलान
भारत की पहली बुलेट ट्रेन बिहार से होकर गुजरेगी. केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने घोषणा की कि हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर वाराणसी, पटना और सिलीगुड़ी को जोड़ेगा.
पटना: केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने सोमवार को घोषणा की कि भारत का पहला बुलेट ट्रेन रूट बिहार से होकर गुजरेगा, जो वाराणसी को सिलीगुड़ी से जोड़ेगा और पटना में एक मुख्य स्टॉप होगा. इस प्रोजेक्ट को राज्य के लिए 'गेम चेंजर' बताते हुए, अश्विनी वैष्णव ने कहा कि हाई-स्पीड कॉरिडोर कनेक्टिविटी को बढ़ाएगा, आर्थिक विकास को गति देगा और क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा देगा.
एक प्रेस ब्रीफिंग को संबोधित करते हुए, केंद्रीय मंत्री ने यह भी बताया कि तमिलनाडु को दो नए बुलेट ट्रेन कॉरिडोर मिलेंगे, जिन्हें 7,611 करोड़ रुपये के रिकॉर्ड रेलवे बजट आवंटन से सपोर्ट मिलेगा. उन्होंने बताया कि जो कांग्रेस के नेतृत्व वाली UPA सरकार के दौरान दिए गए बजट से नौ गुना ज्यादा है.
कितने बुलेट ट्रेन रूट बनाने की है योजना?
खास बात यह है कि वाराणसी-सिलीगुड़ी हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर देश भर में सात नए बुलेट ट्रेन रूट बनाने की केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना का हिस्सा है. पटना और संभावित रूप से कटिहार जैसे बिहार के प्रमुख स्थानों से गुजरने वाला यह कॉरिडोर उत्तर प्रदेश को पश्चिम बंगाल से जोड़ेगा, साथ ही बिहार को भारत के बढ़ते हाई-स्पीड रेल नेटवर्क में इंटीग्रेट करेगा.
उम्मीद है कि एक बार चालू होने के बाद यह वाराणसी और सिलीगुड़ी के बीच मौजूदा 14-18 घंटे की यात्रा को तीन घंटे से भी कम कर देगा, जिसमें ट्रेनें 300-350 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलेंगी.
प्रस्तावित हाई-स्पीड कॉरिडोर के बारे में क्या बताया?
प्रस्तावित दिल्ली-वाराणसी और वाराणसी-सिलीगुड़ी हाई-स्पीड कॉरिडोर के बारे में उन्होंने कहा कि ये बुलेट ट्रेन रूट उत्तर प्रदेश के प्रमुख शहरों को जोड़ेंगे और कई आर्थिक अवसर पैदा करेंगे. रेल मंत्री ने आगे कहा, 'अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत, 157 स्टेशनों का पुनर्विकास किया जा रहा है और अब तक अमृत भारत ट्रेनों के चार जोड़े चालू किए गए हैं.'
कितना है रेलवे बजट 2026-27?
केंद्रीय बजट 2026-27 में भारतीय रेलवे के लिए 2,93,030 करोड़ रुपये का रिकॉर्ड पूंजीगत व्यय तय किया गया है. जो अब तक का सबसे ज्यादा है. अपने दीर्घकालिक परिवहन विजन के हिस्से के रूप में सरकार ने सात हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर को मंजूरी दी है. जिन्हें स्थायी इंटर-सिटी यात्रा के लिए विकास कनेक्टर के रूप में डिजाइन किया गया है.
प्लान किए गए रूट्स में मुंबई-पुणे, पुणे-हैदराबाद, हैदराबाद-बेंगलुरु, हैदराबाद-चेन्नई, चेन्नई-बेंगलुरु, दिल्ली-वाराणसी और वाराणसी-सिलीगुड़ी शामिल हैं. इन कॉरिडोर का मकसद ट्रैवल टाइम को काफी कम करना और बिना किसी रुकावट के मल्टीमॉडल पैसेंजर मूवमेंट को मुमकिन बनाना है.
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