बिहार में पेपर लीक आरोपियों पर लगेगा गुंडा एक्ट, जानिए किस राज्य में सबसे सख्त कानून
बिहार सरकार ने पेपर लीक के आरोपियों पर गुंडा एक्ट लगाने का फैसला किया है.राज्य मंत्रिपरिषद ने बिहार अपराध नियंत्रण अधिनियम में संशोधन के प्रस्ताव को मंजूरी दी है.
पटना: प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक की बढ़ती घटनाओं के बीच बिहार सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. अब राज्य में पेपर लीक के आरोपियों के खिलाफ गुंडा एक्ट के तहत भी कार्रवाई की जा सकेगी. इस फैसले को राज्य मंत्रिपरिषद की मंजूरी मिल चुकी है. बिहार के इस फैसले ने एक बार फिर देशभर में लागू पेपर लीक कानूनों की चर्चा तेज कर दी है. कई राज्यों में पहले से ही ऐसे अपराधों के लिए आजीवन कारावास, करोड़ों रुपये के जुर्माने और संपत्ति जब्त करने तक के प्रावधान मौजूद हैं. ऐसे में सवाल है कि सबसे सख्त कानून किस राज्य में लागू है.
बिहार ने कानून में किया अहम बदलाव
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में हुई राज्य मंत्रिपरिषद की बैठक में बिहार अपराध नियंत्रण अधिनियम, 2024 में संशोधन के प्रारूप को मंजूरी दी गई. इसके बाद पेपर लीक के आरोपियों पर गुंडा एक्ट लगाने का रास्ता साफ हो गया. संशोधन में पेपर लीक के अलावा अन्य कई अपराधों को भी शामिल किया गया है, जिन पर छह महीने से एक वर्ष तक की सजा का प्रावधान रखा गया है.
गुंडा एक्ट लागू होने का क्या असर होगा
गुंडा एक्ट का इस्तेमाल आमतौर पर आदतन अपराधियों और संगठित गिरोहों के खिलाफ किया जाता है.इसके तहत प्रशासन आरोपी की गतिविधियों पर निगरानी रख सकता है और आवश्यक प्रशासनिक कार्रवाई कर सकता है.सरकार अब पेपर लीक को भी संगठित अपराध मानते हुए भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के साथ इस कानून का उपयोग कर सकेगी.
Also Read
केंद्र का कानून भी है काफी सख्त
सार्वजनिक परीक्षाओं में धांधली रोकने के लिए केंद्र सरकार ने Public Examinations (Prevention of Unfair Means) Act, 2024 लागू किया है. यह UPSC, SSC, NTA, RRB और IBPS जैसी परीक्षाओं पर लागू होता है. प्रश्नपत्र लीक करना, सॉल्वर गैंग चलाना, पेपर खरीदना बेचना या परीक्षा प्रणाली से छेड़छाड़ करना अपराध की श्रेणी में आता है. दोषी पाए जाने पर तीन से दस वर्ष तक की सजा और एक करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है.
इन राज्यों में पहले से लागू हैं कड़े प्रावधान
राजस्थान, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और गुजरात ने पेपर लीक रोकने के लिए अलग अलग कानून बनाए हैं. राजस्थान और उत्तर प्रदेश में गंभीर मामलों में आजीवन कारावास और एक करोड़ रुपये तक जुर्माने का प्रावधान है. उत्तराखंड में आजीवन जेल, 10 लाख से 10 करोड़ रुपये तक जुर्माना और संपत्ति कुर्क करने की व्यवस्था है. गुजरात में दोषियों को 10 साल तक की सजा दी जा सकती है.
कानून के साथ तेज जांच भी जरूरी
पेपर लीक को अब संगठित अपराध के रूप में देखा जा रहा है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि केवल सख्त कानून बनाना पर्याप्त नहीं होगा. ऐसे मामलों में समयबद्ध जांच, मजबूत सबूत और दोषियों को शीघ्र सजा दिलाना भी उतना ही जरूरी है. हाल के कई चर्चित मामलों में अदालतों ने सबूतों से छेड़छाड़ की आशंका को देखते हुए आरोपियों की जमानत याचिकाएं भी खारिज की हैं.