डेब्यू पर लिए 9 विकेट, दलीप ट्रॉफी में रचा इतिहास; फिर भी टीम इंडिया में नहीं मिला लंबा मौका
देबाशीष मोहंती ने फर्स्ट क्लास डेब्यू पर 9 विकेट और दलीप ट्रॉफी की एक पारी में सभी 10 विकेट लेने का कारनामा किया. 1999 वर्ल्ड कप में उन्होंने 10 विकेट हासिल किए.
नई दिल्ली: भारतीय क्रिकेट में कई ऐसे गेंदबाज रहे हैं, जिनका घरेलू रिकॉर्ड शानदार रहा, लेकिन इंटरनेशनल क्रिकेट में उन्हें ज्यादा मौके नहीं मिल सके. पूर्व तेज गेंदबाज देबाशीष मोहंती का करियर भी ऐसी ही कहानी बयां करता है.
फर्स्ट क्लास डेब्यू पर 9 विकेट लेने से लेकर दलीप ट्रॉफी की एक पारी में सभी 10 विकेट चटकाने तक, मोहंती ने घरेलू क्रिकेट में कई यादगार उपलब्धियां हासिल कीं. इसके बावजूद भारत के लिए उनका टेस्ट करियर सिर्फ दो मुकाबलों तक सीमित रहा.
मोहंती ने कब किया फर्स्ट क्लास डेब्यू?
नवंबर 1996 में ईडन गार्डन्स पर बंगाल के खिलाफ मोहंती ने फर्स्ट क्लास डेब्यू किया. पहली पारी में उन्होंने 5 विकेट लिए और मैच में कुल 9 विकेट हासिल किए. इस शानदार शुरुआत के बाद उन्हें जल्द ही भारतीय टेस्ट टीम में जगह मिल गई.
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मोहंती ने कब किया टेस्ट डेब्यू?
अगस्त 1997 में कोलंबो के सिंहलीज स्पोर्ट्स क्लब में श्रीलंका के खिलाफ मोहंती ने टेस्ट डेब्यू किया. उन्होंने पहली पारी में 4 विकेट लेकर शानदार प्रदर्शन किया. इस दौरान उन्होंने सनथ जयसूर्या, रोशन महानामा, अर्जुन रणतुंगा और अरविंदा डी सिल्वा जैसे बल्लेबाजों को आउट किया. हालांकि, मोहंती अपने टेस्ट करियर में सिर्फ दो मुकाबले ही खेल सके और उनके नाम कुल 4 विकेट रहे.
वनडे क्रिकेट में उन्हें ज्यादा अवसर मिले. सितंबर 1997 में पाकिस्तान के खिलाफ उन्होंने वनडे डेब्यू किया. अगले ही मैच में उन्होंने शाहिद आफरीदी, सईद अनवर और इजाज अहमद के विकेट लेकर अपनी स्विंग गेंदबाजी का असर दिखाया.
1999 वर्ल्ड कप में भी मोहंती भारतीय टीम का हिस्सा थे. उन्होंने टूर्नामेंट में 6 मैचों में 10 विकेट लिए. केन्या के खिलाफ उन्होंने 4/56 का शानदार प्रदर्शन किया. वहीं इंग्लैंड के खिलाफ एजबेस्टन में उन्होंने एलेक स्टीवर्ट और ग्राहम हिक को लगातार गेंदों पर आउट कर भारत को शुरुआती बढ़त दिलाई. ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ उन्होंने स्टीव वॉ का अहम विकेट भी लिया.
कब किया था सबसे यादगार प्रदर्शन?
मोहंती के करियर का सबसे यादगार प्रदर्शन जनवरी 2001 में दलीप ट्रॉफी में आया. अगरतला में ईस्ट जोन के खिलाफ साउथ जोन की टीम में राहुल द्रविड और वीवीएस लक्ष्मण जैसे बल्लेबाज मौजूद थे. मोहंती ने सिर्फ 19 ओवर में 46 रन देकर साउथ जोन के सभी 10 विकेट हासिल कर इतिहास रच दिया. द्रविड बिना खाता खोले आउट हुए, जबकि लक्ष्मण 20 रन पर बोल्ड हुए. दूसरी पारी में उन्होंने 4 और विकेट लिए और मैच में कुल 14 विकेट पूरे किए.
इसके बावजूद इसके कुछ महीनों बाद ही उनका इंटरनेशनल करियर लगभग खत्म हो गया. जुलाई 2001 में उन्होंने भारत के लिए अपना आखिरी वनडे खेला. इसके बाद उन्हें राष्ट्रीय टीम में दोबारा मौका नहीं मिला. मोहंती ने घरेलू क्रिकेट में शानदार प्रदर्शन जारी रखा. उन्होंने 117 फर्स्ट क्लास मैचों में 417 विकेट और 129 लिस्ट-ए मैचों में 160 विकेट हासिल किए. भारत के लिए उन्होंने कुल 47 इंटरनेशनल मैच खेले, जिसमें 2 टेस्ट और 45 वनडे शामिल रहे.
क्रिकेट से संन्यास के बाद मोहंती ने कोचिंग और चयन की जिम्मेदारियां संभालीं. वह बीसीसीआई की जूनियर और सीनियर चयन समितियों का हिस्सा भी रहे. उनका करियर आज भी इस बात की मिसाल है कि शानदार घरेलू रिकॉर्ड के बावजूद किसी खिलाड़ी को इंटरनेशनल स्तर पर लंबे समय तक मौके मिलना हमेशा तय नहीं होता.