कोविड वैक्सीन ने ली थी क्रिकेटर शेन वॉर्न की जान! बेटे ने मौत को लेकर किया बड़ा दावा

ऑस्ट्रेलिया के महान स्पिनर शेन वॉर्न की मौत के चार साल बाद उनके बेटे जैक्सन ने दावा किया कि कोविड वैक्सीन ने उनकी हालत को प्रभावित किया होगा, जिससे बहस फिर तेज हो गई है.

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Kuldeep Sharma

महान क्रिकेटर शेन वॉर्न के निधन को चार साल बीत चुके हैं, लेकिन अब एक नया दावा चर्चा में आ गया है. उनके बेटे जैक्सन ने हाल ही में एक पॉडकास्ट में कहा कि उन्हें लगता है कि कोविड-19 वैक्सीन का उनके पिता की मौत में कुछ न कुछ योगदान रहा हो सकता है. हालांकि उन्होंने यह भी माना कि वार्न को पहले से कुछ स्वास्थ्य समस्याएं थीं. इस बयान के बाद एक बार फिर इस विषय पर बहस शुरू हो गई है.

बेटे का दावा और भावनात्मक प्रतिक्रिया

जैक्सन ने एक पॉडकास्ट में खुलकर अपनी भावनाएं साझा करते हुए कहा कि उन्हें हमेशा से यह महसूस होता रहा है कि कोविड वैक्सीन का असर उनके पिता की सेहत पर पड़ा. उन्होंने बताया कि जब उन्हें अपने पिता के निधन की खबर मिली, तो उनकी पहली प्रतिक्रिया गुस्से और सवालों से भरी थी. उन्होंने तुरंत इसके लिए कोविड और टीकाकरण को जिम्मेदार ठहराया. हालांकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि उस समय उन्होंने सार्वजनिक रूप से ऐसा कुछ नहीं कहा, क्योंकि इससे विवाद खड़ा हो सकता था.

हेल्थ और लाइफ स्टाइल पर चर्चा

जैक्सन ने यह भी बताया कि उनके पिता की लाइफस्टाइल में स्मोकिंग और शराब शामिल थी, लेकिन इसके बावजूद वे खुद को ठीक महसूस कर रहे थे. उनके अनुसार, निधन से पहले वार्न खुश और फिट नजर आ रहे थे. उन्होंने यह भी कहा कि दुनिया में कई लोग उनसे ज्यादा अस्वस्थ लाइफस्टाइल के बावजूद लंबा जीवन जीते हैं. इस वजह से उन्हें यह मानना मुश्किल लगता है कि केवल लाइफस्टाइल  ही उनकी मौत का कारण रही होगी.

मौत की परिस्थितियां और तथ्य

गौरतलब है कि शेन वॉर्न का 2022 में थाईलैंड में दिल का दौरा पड़ने से निधन हुआ था. उस समय उनकी उम्र 52 वर्ष थी. रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन्हें पहले कोविड-19 संक्रमण भी हुआ था, लेकिन उनकी हालत गंभीर नहीं थी. उनकी अचानक मौत ने उस समय भी कई सवाल खड़े किए थे. हालांकि आधिकारिक तौर पर उनकी मौत का कारण हार्ट अटैक ही बताया गया था और किसी अन्य कारण की पुष्टि नहीं हुई थी.

दावे पर उठते सवाल और बहस

जैक्सन के इस बयान के बाद एक बार फिर कोविड वैक्सीन को लेकर बहस तेज हो गई है. विशेषज्ञों का मानना है कि बिना ठोस वैज्ञानिक प्रमाण के ऐसे दावे सावधानी से देखने चाहिए. दूसरी ओर, यह भी सच है कि किसी करीबी को खोने के बाद परिवार के मन में कई सवाल उठते हैं. फिलहाल, इस मामले में कोई नया आधिकारिक निष्कर्ष सामने नहीं आया है, लेकिन यह बयान निश्चित रूप से चर्चा और बहस को फिर से जिंदा कर रहा है.