28 साल बाद 33 की उम्र में टेस्ट डेब्यू, जानिए कौन हैं ऑलराउंडर सारांश जैन?
श्रीलंका के खिलाफ दूसरे टेस्ट में 33 वर्षीय ऑलराउंडर सारांश जैन ने भारत के लिए टेस्ट डेब्यू किया. चोटिल वॉशिंगटन सुंदर की जगह आए सारांश घरेलू क्रिकेट में शानदार प्रदर्शन के बाद टीम में पहुंचे.
नई दिल्ली: भारत और श्रीलंका के बीच दूसरे टेस्ट में टीम इंडिया की प्लेइंग इलेवन में एक नया चेहरा देखने को मिला. मध्य प्रदेश के ऑलराउंडर सारांश जैन ने 33 साल की उम्र में टेस्ट क्रिकेट में कदम रखा. टॉस से पहले रवींद्र जडेजा ने उन्हें टेस्ट कैप सौंपी. सारांश दाएं हाथ के ऑफ स्पिनर होने के साथ उपयोगी बल्लेबाज भी हैं. उन्हें चोटिल वॉशिंगटन सुंदर की जगह टीम में शामिल किया गया है, जिससे भारत को निचले क्रम में अतिरिक्त विकल्प मिला है.
सारांश जैन 33 साल की उम्र के बाद भारत के लिए अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेलने वाले दूसरे खिलाड़ी हैं. उनसे पहले 1998 में रोबिन सिंह ने इसी उम्र में भारतीय टीम में पदार्पण किया था. सारांश दाएं हाथ से ऑफ स्पिन गेंदबाजी करते हैं और बल्लेबाजी भी कर सकते हैं. यही ऑलराउंड क्षमता उन्हें वॉशिंगटन सुंदर का स्वाभाविक विकल्प बनाती है.
घरेलू क्रिकेट में लगातार शानदार प्रदर्शन
सारांश ने 2014 में रणजी ट्रॉफी से प्रथम श्रेणी क्रिकेट का सफर शुरू किया था. हालांकि पहचान उन्हें 2022 में मिली, जब रणजी ट्रॉफी के नॉकआउट मुकाबलों में उन्होंने मध्य प्रदेश के लिए 13 विकेट लिए और अर्धशतक भी लगाया. उस प्रदर्शन में टीम ने पहली बार रणजी ट्रॉफी का खिताब अपने नाम किया. इसके बाद वह घरेलू क्रिकेट में लगातार अपनी उपयोगिता साबित करते रहे.
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पिछले सीजन में किया शानदार प्रदर्शन
हालिया रणजी ट्रॉफी सीजन सारांश के लिए बेहद सफल रहा. उन्होंने 57.55 की औसत से 518 रन बनाए और 20.43 की औसत से 30 विकेट हासिल किए. इससे पहले दलीप ट्रॉफी में भी उनका प्रदर्शन प्रभावशाली रहा था. सेंट्रल जोन की ओर से खेलते हुए उन्होंने दो मैचों में दो अर्धशतक लगाए और 16 विकेट लेकर प्लेयर ऑफ द सीरीज का पुरस्कार हासिल किया.
भारत ए के दौरे ने मजबूत की दावेदारी
सारांश इसी महीने भारत ए के साथ श्रीलंका दौरे पर भी गए थे. पहले मुकाबले में उनका प्रदर्शन खास नहीं रहा, लेकिन दूसरे मैच में उन्होंने नाबाद 70 रन बनाए और छह विकेट चटकाए. इस प्रदर्शन ने उन्हें टेस्ट टीम में जगह पाने की दौड़ में मजबूत कर दिया. श्रीलंका की परिस्थितियों और टीम में बाएं हाथ के बल्लेबाजों की संख्या को देखते हुए ऑफ स्पिनर के रूप में उनकी उपयोगिता बढ़ गई.
अश्विन को मानते हैं अपना आदर्श
सारांश जैन भारतीय दिग्गज रविचंद्रन अश्विन को अपना सबसे बड़ा आदर्श मानते हैं. उन्होंने 2024 में कहा था कि वह अश्विन को देखकर प्रेरणा लेते हैं और उन्हीं की तरह पूरी प्रतिबद्धता के साथ क्रिकेट खेलना चाहते हैं. उनके पिता सुबोध जैन भी प्रथम श्रेणी क्रिकेटर रहे हैं. चोटिल सुंदर की गैरमौजूदगी में सारांश को मौका मिला है. तीसरे स्पिनर के विकल्प में मानव सुथार भी टीम में हैं, जिससे मुकाबला और दिलचस्प हो गया है.