पाकिस्तान क्रिकेट टीम की फजीहत आज पूरी दुनिया में होती है. आज जो टीम की स्थिति उसे देखकर कोई नहीं कह सकता है कि टीम ने कभी क्रिकेट पर राज भी किया होगा या कभी पाकिस्तान ने बाकियों टीमों पर डॉमिनेंट किया था. भले ही आज पाकिस्तान की कोई भी स्थिति हो लेकिन पुरानी पाकिस्तानी टीम ऐसी नहीं थी. उस समय में टीम में ऐसे बल्लेबाज थे जिन्होंने टीम को बुलंदियों तक पहुंचाया था. उन पाकिस्तानी खिलाड़ियों में सईद अनवर का नाम लिया जाता है.
वह ऐसे बल्लेबाज थे, जिन्होंने अपनी खूबसूरत टाइमिंग और आक्रामक अंदाज से अलग पहचान बनाई. 1990 से 2003 तक चले करियर में उन्होंने टेस्ट और वनडे दोनों में खूब रन बनाए. भारत के खिलाफ 194 रन की पारी ने उन्हें खास पहचान दिलाई थी. हालांकि, उनकी जिंदगी में एक ऐसा हादसा भी आया, जिसने क्रिकेट से उनका रिश्ता बदल दिया. बेटी की मौत के बाद उन्होंने टेस्ट क्रिकेट से दूरी बना ली और बाद में वह मौलवी बन गए.
1997 में चेन्नई में भारत के खिलाफ सईद अनवर ने 146 गेंदों पर 194 रन बनाए थे. उस समय वनडे क्रिकेट में यह सबसे बड़ी व्यक्तिगत पारी थी. अनवर दोहरे शतक से सिर्फ छह रन दूर थे, लेकिन सचिन तेंदुलकर की गेंद पर सौरव गांगुली ने उनका कैच पकड़ लिया. 2009 में जिम्बाब्वे के चार्ल्स कोवेंट्री ने नाबाद 194 रन बनाकर इस रिकॉर्ड की बराबरी की. अगले साल सचिन ने नाबाद 200 रन बनाकर इसे पीछे छोड़ दिया.
टेस्ट क्रिकेट में भी अनवर का बल्ला खूब चला. 1994 में वेलिंगटन में न्यूजीलैंड के खिलाफ 169 रन बनाकर उन्होंने अपना पहला टेस्ट शतक लगाया. 1996 में द ओवल में इंग्लैंड के खिलाफ 176 रन बनाए. भारत के खिलाफ 1998 के कोलकाता टेस्ट में उनका नाबाद 188 रन सर्वोच्च टेस्ट स्कोर रहा. पाकिस्तान के लिए उन्होंने 55 टेस्ट में 4052 रन और 11 शतक बनाए. 247 वनडे में 8824 रन, 20 शतक उनके नाम रहे.
अगस्त 2001 में मुल्तान टेस्ट में बांग्लादेश के खिलाफ अनवर ने 101 रन बनाए. यह उनका आखिरी टेस्ट शतक साबित हुआ. मुकाबले के कुछ ही दिन बाद उनकी साढ़े तीन साल की बेटी बिस्माह का लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया. अनवर लाहौर लौट गए और इस सदमे के बाद उन्होंने फिर टेस्ट क्रिकेट नहीं खेला. हालांकि, वनडे में वापसी करते हुए उन्होंने 2003 वर्ल्ड कप में भारत के खिलाफ शतक लगाया और इसे बेटी को समर्पित किया.
सईद अनवर ने 15 अगस्त 2003 को इंटरनेशनल और फर्स्ट क्लास क्रिकेट को अलविदा कह दिया. इसके बाद उनका झुकाव धार्मिक गतिविधियों की ओर बढ़ा और वह इस्लाम के प्रचार से जुड़े कार्यक्रमों में सक्रिय रहे. पाकिस्तान के पूर्व बल्लेबाज मोहम्मद यूसुफ के धर्म परिवर्तन में भी अनवर की भूमिका रही. यूसुफ ने 2004 में इस्लाम अपनाया था. क्रिकेट से विदाई के बाद अनवर की जिंदगी का यह नया अध्याय भी काफी चर्चा में रहा.