सुनील गावस्कर ने लक्ष्य सेन के ओलंपिक 2024 में खराब प्रदर्शन की आलोचना की है. पेरिस ओलंपिक 2024 में लक्ष्य सेन मेडल जीतते-जीतते रह गए. सेमीफाइनल और फिर ब्रॉन्ज मैच में बढ़त बनाने के बाद वे मुकाबला हार गए. पेरिस ओलंपिक में लक्ष्य सेन से मेडल की उम्मीद थी, लेकिन इस ओलंपिक में बैडमिंटन से एक भी पदक नहीं मिला.
पेरिस ओलंपिक 2024 भारतीय खेल प्रशंसकों के लिए एक कड़वा-मीठा अनुभव रहा है. टोक्यो 2020 ओलंपिक में भारत ने रिकॉर्ड सात पदक जीते थे, जिसके बाद उम्मीद थी कि पेरिस ओलंपिक में पदकों की संख्या और बढ़ेगी. पेरिस में भारत ने 6 मेडल जीते. हालांकि कई खेल में भारतीय एथलीट मामली अंतर से मेडल से चूक गए. बैडमिंटन एक ऐसा खेल था जिसमें भारत ने पिछले तीन संस्करणों में अच्छा प्रदर्शन किया है.
2012 ओलंपिक से भारतीय बैडमिंटन सितारे कम से कम एक पदक के साथ लौटे हैं. हालांकि, इस बार कोई पदक नहीं मिला. सात्विक साईराज रंकीरेड्डी और चिराग शेट्टी की स्टार जोड़ी सेमीफाइनल में प्रवेश नहीं कर सकी. सिंगल्स में लक्ष्य सेन ओलंपिक सेमीफाइनल में प्रवेश करने वाले पहले भारतीय पुरुष शटलर बने, लेकिन मजबूत स्थिति में होने के बावजूद महत्वपूर्ण मैच हार गए. बैडमिंटन के दिग्गज प्रकाश पादुकोण ने कहा कि बैडमिंटन सितारों के लिए अच्छे परिणाम लाने का समय आ गया है क्योंकि सरकार और अन्य हितधारकों से पर्याप्त समर्थन मिल रहा है.
इस टिप्पणी की कई लोगों ने आलोचना की है. हालांकि, भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान सुनील गावस्कर ने प्रकाश पादुकोण का समर्थन किया है और लक्ष्य सेन की आलोचना की है. गावस्कर ने स्पोर्टस्टार के लिए लिखे कॉलम में कहा कि 2017/18 में प्रकाश ने मुझे इस बच्चे, लक्ष्य सेन के बारे में बताया था. उन्होंने उसे अपने संरक्षण में लिया था और उसके मार्गदर्शक और गुरु थे. उन्होंने लक्ष्य की प्रगति को कदम दर कदम देखा होगा. जब वह ओलंपिक पदक के करीब पहुंचा, तो प्रकाश कड़ी मेहनत करने वाले और अथक परिश्रम करने वाले विमल कुमार के साथ कोर्ट के किनारे बैठे थे ताकि न केवल लक्ष्य का सपना पूरा हो बल्कि भारतीय बैडमिंटन प्रेमियों के पूरे समुदाय का सपना भी पूरा हो.
सुनील गवास्कर ने आगे कहा कि फिर सेमीफाइनल विक्टर एक्सेलसन के खिलाफ में 20-17 और 7-0 की बढ़त को गंवाना और फिर पहला गेम आसानी से जीतने के बाद कांस्य पदक मैच ली जी जिया के खिलाफ हारना वाकई दिल दहला देने वाला रहा होगा. विमल कुमार, BAI और सरकार ने हर संभव कोशिश की थी, लेकिन जब मौके आए कब लक्ष्य, भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान (रोहित शर्मा) के प्रसिद्ध शब्दों में 'गार्डन में घूमने वाला' था.
गावस्कर ने लिखा जिन लोगों ने सेमीफाइनल और कांस्य पदक के मैच देखे, उन्हें ऐसा लगा कि लक्ष्य की सोच और एकाग्रता की प्रवृत्ति खो गई थी, जिस तरह से वह अंकों के बीच या बदलाव के समय अपनी पानी की बोतल से घूंट लेते हुए अपने रैकेट की ओर देखता था.