पैरा शटलर प्रमोद भगत डोपिंग में फंसे, टोक्यो में दिलाया था गोल्ड मेडल
प्रमोद भगत एक एसएल-3 एथलीट हैं. प्रमोद ने टोक्यो 2020 पैरालिंपिक में पुरुष एकल SL3 श्रेणी में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया. यह पहली बार था जब किसी भारतीय ने पैरालिंपिक में बैडमिंटन में स्वर्ण पदक जीता था. उन्होंने फाइनल में ग्रेट ब्रिटेन के दूसरे वरीय डेनियल बेथेल को 21-14, 21-17 के स्कोर से हराया था.
पेरिस पैरालिंपिक से पहले भारत को बड़ा झटका लगा है. टोक्यो में गोल्ड जीतने वाले पैरा शटलर प्रमोद भगत डोपिंग टेस्ट में फेल हो गए हैं. बैडमिंटन वर्ल्ड फेडरेशन (BWF) के डोपिंग रोधी नियमों के उल्लंघन का दोषी पाए जाने के बाद प्रमोद भगत 2024 पेरिस पैरालिंपिक का हिस्सा नहीं होंगे. BWF ने मंगलवार, 13 अगस्त को इस खबर की पुष्टि की. 1 मार्च को, कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन ऑफ स्पोर्ट (CAS) के एंटी-डोपिंग डिवीजन ने बैडमिंटन खिलाड़ी को 12 महीनों के भीतर तीन बार ठिकाने की जानकारी न देने के लिए BWF के डोपिंग रोधी नियमों का उल्लंघन करते हुए पाया.
प्रमोद भगत एक एसएल 3 एथलीट हैं. उन्होंने सीएएस अपील डिवीजन में अपील की थी, लेकिन उनकी अपील 29 जुलाई, 2024 को खारिज कर दी गई थी. सीएएस अपील डिवीजन ने 1 मार्च को अपने फैसले की पुष्टि की. 11 अगस्त को ओलंपिक समाप्त होने के बाद पैरालिंपिक 28 अगस्त से 8 सितंबर तक होंगे और प्रतियोगिता 11 दिनों तक चलेगी.
18 महीने के लिए निलंबित
बीडब्ल्यूएफ ने बयान में कहा कि टोक्यो 2020 पैरालंपिक चैंपियन प्रमोद भगत को 18 महीने के लिए निलंबित कर दिया गया है और वह पेरिस 2024 पैरालंपिक खेलों में भी हिस्सा नहीं लेंगे. प्रमोद ने टोक्यो 2020 पैरालिंपिक में पुरुष एकल SL3 श्रेणी में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया. यह पहली बार था जब किसी भारतीय ने पैरालिंपिक में बैडमिंटन में स्वर्ण पदक जीता था. उन्होंने फाइनल में ग्रेट ब्रिटेन के दूसरे वरीय डेनियल बेथेल को 21-14, 21-17 के स्कोर से हराया. पूरे टूर्नामेंट में भगत ने अपना दबदबा दिखाया.
1988 में जन्मे भगत को पांच साल की उम्र में पोलियो हो गया था, जिसके कारण उनके बाएं पैर में विकलांगता आ गई थी. इसके बावजूद, वह 13 साल की उम्र में बैडमिंटन की ओर आकर्षित हुए और एक पेशेवर खिलाड़ी बन गए.