भारतीय क्रिकेट के अनुभवी तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी आज अपना 36वां जन्मदिन मना रहे हैं. उम्र बढ़ने के बावजूद मैदान पर उनकी तेजी और गेंद को स्विंग कराने की कला में कमी नहीं आई है. आज बल्लेबाज को अपनी गेंदबाजी से डराने वाले मोहम्मद शमी का क्रिकेट करियर इतना आसान नहीं रहा है. उन्होंने अपने करियर में बहुत से उतार चढ़ाव से गुजरना पड़ा है.
अमरोहा से शुरू हुआ उनका सफर आसान नहीं रहा. यूपी में मौका नहीं मिला तो उन्होंने बंगाल का रुख किया और क्लब क्रिकेट से अपनी पहचान बनाई. ईडन गार्डंस में सौरव गांगुली को प्रभावित करने के बाद उनका करियर आगे बढ़ा और अब वह 900 प्रोफेशनल विकेट पूरे कर चुके हैं.
मोहम्मद शमी उत्तर प्रदेश के अमरोहा से आते हैं. अंडर 19 स्तर पर UP की टीम में जगह नहीं मिलने के बाद उन्होंने करीब 2005 में कोलकाता का रुख किया. शुरुआती दौर में उनके सामने रहने तक की समस्या थी. क्लब क्रिकेट में देवव्रत दास ने उनकी गेंदबाजी देखी और मदद की. मोहन बगान से खेलते हुए शमी को आगे बढ़ने का रास्ता मिला और फिर बंगाल की रणजी टीम में जगह बनी.
1️⃣9️⃣7️⃣ International Games 👌
4️⃣6️⃣2️⃣ International Wickets 👍
2️⃣nd Indian to pick an ODI World Cup hat-trick 🙌
2️⃣0️⃣2️⃣5️⃣ ICC Champions Trophy-winner 🏆
Here's wishing Mohammad Shami a very happy birthday! 🎂 👏#TeamIndia pic.twitter.com/IGgSAQgwgtAlso Read
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— BCCI (@BCCI) September 3, 2026
शमी की गेंदबाजी की सबसे बड़ी पहचान उनकी स्विंग और रिवर्स स्विंग रही है. मुरादाबाद में अभ्यास के दौरान वह उन पुरानी गेंदों से भी मेहनत करते थे, जिन्हें दूसरे खिलाड़ी बेकार मानकर अलग कर देते थे. वह एक तरफ की चमक बचाकर दूसरी तरफ बने रफ हिस्से से गेंद को हवा में अंदर लाने की कोशिश करते. इसी अभ्यास ने आगे चलकर उनकी गेंदबाजी को खास धार दी.
मोहन बगान के लिए खेलते हुए शमी को ईडन गार्डंस में सौरव गांगुली के सामने गेंदबाजी करने का मौका मिला. उनकी गेंदों ने गांगुली को प्रभावित किया. इसके बाद पूर्व कप्तान ने बंगाल के चयनकर्ताओं से शमी को मौका देने की बात की. जल्द ही उन्हें रणजी ट्रॉफी टीम में शामिल किया गया. यहीं से घरेलू क्रिकेट में उनकी पहचान मजबूत होने लगी और आगे भारतीय टीम तक पहुंचने का रास्ता खुला.
जन्मदिन से पहले शमी ने दलीप ट्रॉफी सेमीफाइनल की दोनों पारियों में पांच विकेट लेकर प्रोफेशनल क्रिकेट में अपने 900 विकेट पूरे किए. फिलहाल वह भारतीय टीम से बाहर हैं और वापसी की कोशिश में जुटे हैं. चयनकर्ताओं की ओर से उनकी फिटनेस को लेकर सवाल उठते रहे हैं, लेकिन घरेलू क्रिकेट में लाल गेंद से वह लगातार खुद को साबित कर रहे हैं. 36 की उम्र में भी शमी की भूख कम नहीं हुई है.