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Sakshi Malik Birthday: छोटे से गांव से ओलंपिक पोडियम तक, आखिरी 9 सेकंड में बदल दी भारतीय कुश्ती की तस्वीर

साक्षी मलिक ने बेहद मुश्किल हालात से निकलकर रियो ओलंपिक 2016 में कांस्य पदक जीता. आखिरी 9 सेकंड में हासिल किए दो अंकों ने उन्हें ओलंपिक पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला पहलवान बना दिया. आज 2 सितंबर को उनके जन्मदिन के दिन उनकी इस प्रेरणादायक कहानी को जानिए.

Ashutosh
Edited By: Ashutosh Rai
Sakshi Malik Birthday: छोटे से गांव से ओलंपिक पोडियम तक, आखिरी 9 सेकंड में बदल दी भारतीय कुश्ती की तस्वीर
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Sakshi Malik Birthday: 3 सितंबर 1992 को हरियाणा के रोहतक के मोखरा गांव में जन्मीं साक्षी मलिक ने भारतीय कुश्ती को नई पहचान दी. परिवार की शुरुआती नाराजगी के बावजूद उन्होंने पहलवानी नहीं छोड़ी. रियो ओलंपिक में उनका शानदार प्रदर्शन आज भी याद किया जाता है, खासकर मुकाबले के आखिरी 9 सेकंड. 

दादा से मिली प्रेरणा

साक्षी का बचपन ऐसे दौर में बीता, जब हरियाणा में बेटियों को लेकर सोच आज जैसी नहीं थी. माता-पिता की नौकरी शहर में लगने के बाद वह कुछ समय गांव में अपने दादा सुबीर मलिक के साथ रहीं. दादा खुद पहलवान थे और यहीं से साक्षी को कुश्ती का जुनून मिला. करीब 7 साल की उम्र में वह माता-पिता के साथ रोहतक चली गईं लेकिन तब तक पहलवान बनने का फैसला कर चुकी थी. परिवार ने शुरुआत में उनका साथ नहीं दिया, मगर साक्षी की जिद के आगे आखिरकार उन्हें मानना पड़ा. 12 साल की उम्र में उनकी कुश्ती की ट्रेनिंग शुरू हुई और फिर उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा.

रियो में हार के बाद वापसी

2016 के रियो ओलंपिक में साक्षी ने महिलाओं की 58 किलोग्राम फ्रीस्टाइल कुश्ती में भारत का प्रतिनिधित्व किया. क्वार्टर फाइनल में हार के बाद उनका सफर खत्म होता दिख रहा था लेकिन रेपेचेज के जरिए उन्हें एक और मौका मिला. कांस्य पदक के मुकाबले में वह कजाकिस्तान की पहलवान के खिलाफ पहले राउंड में 0-5 से पिछड़ गई थी. फिर उन्होंने जोरदार वापसी करते हुए स्कोर 5-5 कर दिया. मुकाबले के आखिरी 9 सेकंड में साक्षी ने दो और अंक हासिल किए और 8-5 से जीत दर्ज कर कांस्य पदक अपने नाम कर लिया. वह ओलंपिक पदक जीतने वाली भारत की पहली महिला पहलवान बनी.

पद्म श्री से टाइम 100 तक

ओलंपिक पदक के अलावा साक्षी ने 2014 कॉमनवेल्थ गेम्स में रजत और 2018 में कांस्य जीता. एशियन चैंपियनशिप में भी उनके नाम कई पदक रहे. 2017 में उन्हें पद्म श्री से सम्मानित किया गया और राजीव गांधी खेल रत्न भी मिला. 2024 में वह टाइम की 100 प्रभावशाली लोगों की सूची में जगह बनाने वाली पहली भारतीय पहलवान बनीं. हालांकि उनका करियर विवादों के बीच खत्म हुआ. बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ पहलवानों के आंदोलन में सक्रिय रहने के बाद दिसंबर 2023 में संजय सिंह के कुश्ती संघ अध्यक्ष चुने जाने पर साक्षी ने कुश्ती छोड़ने का ऐलान किया. बाद में उन्होंने कहा कि मौका मिलने पर वह कुश्ती संघ की जिम्मेदारी संभालना चाहेंगी.