आईपीएल और टी-20 के बढ़ते दौर में युवा खिलाड़ियों का ध्यान छोटे फॉर्मेट पर ज्यादा है. ऐसे समय में पूर्व भारतीय तेज गेंदबाज जवागल श्रीनाथ ने टेस्ट क्रिकेट को लेकर अहम बात कही है. इंदौर में उन्होंने युवाओं को सलाह दी कि ग्लैमर के बीच क्रिकेट की बुनियाद को कमजोर नहीं होने देना चाहिए.
जवागल श्रीनाथ ने इंदौर में मध्य प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन के सीजन अवॉर्ड 2025-26 कार्यक्रम में क्रिकेट के बदलते दौर पर अपनी बात रखी. उन्होंने कहा कि टी-20 और आईपीएल क्रिकेट का हिस्सा हैं लेकिन टेस्ट क्रिकेट की अपनी अलग अहमियत है. उनके मुताबिक, पांच दिन का यह फॉर्मेट खिलाड़ी की तकनीक, धैर्य और सोच की असली परीक्षा लेता है. छोटे फॉर्मेट में तेजी से रन बनाना और कम समय में मैच का रुख बदलना जरूरी होता है. वहीं टेस्ट क्रिकेट में खिलाड़ी को लंबे समय तक अपनी योजना पर टिके रहना पड़ता है. श्रीनाथ ने इसी वजह से टेस्ट क्रिकेट को ‘मदर ऑफ क्रिकेट’ बताया. उनका कहना है कि जो खिलाड़ी लाल गेंद के क्रिकेट में खुद को मजबूत करता है, उसके लिए दूसरे फॉर्मेट में ढलना आसान हो सकता है. उन्होंने यह भी कहा कि क्रिकेट को सिर्फ कमाई या मनोरंजन के नजरिए से नहीं देखना चाहिए, नई पीढ़ी को खेल की सही समझ और तकनीक भी सिखाई जानी चाहिए.
वैभव सूर्यवंशी ने बेहद कम उम्र में क्रिकेट की दुनिया में अपनी अलग पहचान बना ली है. बिहार से आने वाले इस युवा बल्लेबाज ने घरेलू क्रिकेट से लेकर आईपीएल तक अपने आक्रामक अंदाज से ध्यान खींचा है. कम उम्र में फर्स्ट क्लास क्रिकेट में खेलने का मौका मिलने के बाद वैभव ने अपनी बल्लेबाजी से लोगों को प्रभावित किया. बड़े शॉट लगाने की उनकी क्षमता और तेजी से रन बनाने का अंदाज उन्हें बाकी खिलाड़ियों से अलग बनाता है.
आईपीएल जैसे बड़े मंच पर खेलने के बाद उनकी लोकप्रियता और चर्चा दोनों तेजी से बढ़ी हैं. हालांकि, श्रीनाथ की सलाह को वैभव जैसे युवा खिलाड़ियों के लिए लंबे करियर की तैयारी से जोड़कर देखा जा सकता है. कम उम्र में मिली सफलता के बाद खिलाड़ी के सामने सबसे बड़ी चुनौती लगातार खुद को बेहतर बनाने की होती है. ऐसे में घरेलू लाल गेंद क्रिकेट, तकनीक और मैच की लंबी परिस्थितियों का अनुभव आगे चलकर उनके लिए काफी काम आ सकता है. टी-20 की सफलता के साथ टेस्ट और फर्स्ट क्लास क्रिकेट में मजबूत आधार बनाना उनके करियर को ज्यादा लंबा और स्थिर बना सकता है.