भारतीय पुरुष हॉकी टीम ने 15 अगस्त को हॉकी वर्ल्ड कप में उतरते ही नया इतिहास बना दिया. कप्तान हरमनप्रीत सिंह की अगुआई में भारत ने वेल्स के खिलाफ मुकाबला खेलते हुए टूर्नामेंट के सभी 16 संस्करणों में हिस्सा लेने वाली पहली टीम का रिकॉर्ड बनाया. अब टीम की नजर खिताब पर है.
FIH पुरुष हॉकी वर्ल्ड कप 2026 नीदरलैंड्स के एम्सटेलवीन स्थित वैगनर स्टेडियम में खेला जा रहा है. भारत ने अपने अभियान की शुरुआत वेल्स के खिलाफ मुकाबले से की. मैदान पर उतरते ही भारतीय टीम ने हॉकी वर्ल्ड कप के इतिहास में अपनी अलग पहचान बना ली. भारत इस टूर्नामेंट के सभी 16 संस्करणों में खेलने वाली पहली टीम बन गया. इससे पहले भारत के साथ स्पेन, नीदरलैंड्स और जर्मनी ने 15-15 वर्ल्ड कप खेले थे और ये तीनों टीमें 2026 संस्करण में भी मौजूद हैं. हालांकि भारत का मुकाबला पहले होने के कारण यह खास रिकॉर्ड सबसे पहले उसके नाम दर्ज हुआ.
विश्व कप में भारत की कहानी 1971 से शुरू हुई थी, जब बार्सिलोना में पहला हॉकी वर्ल्ड कप खेला गया था. भारतीय टीम ने उस टूर्नामेंट में शानदार खेल दिखाया और तीसरे स्थान पर रहते हुए ब्रॉन्ज मेडल जीता. इसके दो साल बाद 1973 में नीदरलैंड्स में हुए वर्ल्ड कप में भारत ने एक कदम और आगे बढ़कर फाइनल में जगह बनाई लेकिन खिताब से चूक गया. भारतीय हॉकी का सबसे बड़ा पल 1975 में आया, जब कुआलालंपुर में टीम ने पाकिस्तान को रोमांचक फाइनल में 2-1 से हराकर अपना पहला और अब तक का इकलौता वर्ल्ड कप खिताब जीता. 2023 में ओडिशा में हुए पिछले वर्ल्ड कप में भारत नौवें स्थान पर रहा था.
2026 वर्ल्ड कप में भारतीय टीम की कमान स्टार डिफेंडर हरमनप्रीत सिंह संभाल रहे हैं. टीम में पूर्व कप्तान मनप्रीत सिंह, अमित रोहिदास और विवेक सागर प्रसाद जैसे अनुभवी खिलाड़ी भी शामिल हैं. भारत के लिए यह टूर्नामेंट सिर्फ रिकॉर्ड बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि टीम लंबे समय बाद विश्व कप ट्रॉफी जीतने की कोशिश करेगी. 1975 के बाद भारत दोबारा पुरुष हॉकी वर्ल्ड कप नहीं जीत सका है. ऐसे में 2026 का अभियान टीम के लिए खास महत्व रखता है. सभी 16 संस्करण खेलने का रिकॉर्ड बनाने के बाद अब भारतीय खिलाड़ियों की कोशिश मैदान पर अच्छा प्रदर्शन कर खिताब की दौड़ में मजबूत दावेदारी पेश करने की होगी.