भारत का पैसा भारत के ही खिलाफ होगा इस्तेमाल, सनराइजर्स लीड्स पर भड़के सुनील गावस्कर

सनराइजर्स हैदराबाद की फ्रेंचाइजी ने द हंंड्रेड में पाकिस्तान के स्पिनर अबरार अहमद को नीलामी  में खरीदा, जिसके बाद विवाद थमने का नाम ही नहीं ले रहा है. इसे लेकर अब सुनील गावस्कर ने आपत्ति चताई जताई है.

@Vigour4bjp X account & ANI
Meenu Singh

नई दिल्ली: भारतीय फ्रेंचाइजी द्वारा पाकिस्तानी खिलाड़ी को टीम में शामिल किए जाने के फैसले ने क्रिकेट जगत में बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है. सनराइजर्स हैदराबाद की फ्रेंचाइजी ने द हंंड्रेड में पाकिस्तान के स्पिनर अबरार अहमद को नीलामी  में खरीदा, जिसके बाद विवाद थमने का नाम ही नहीं ले रहा है. इसे लेकर फैंस तो पहले ही गुस्से में थे.

लेकिन अब भारत के पूर्व क्रिकेट भी भारतीय स्वामित्व वाली फ्रेंचाइजी से गुस्सा हैं. द हंड्रेड इंग्लैंड की पेशेवर सौ गेंदों की क्रिकेट लीग है, जिसमें काव्या मारन के स्वामित्व वाली सनराइजर्स लीड्स ने पाक प्लेयर को टीम में शामिल किया है. 

IPL में पाकिस्तानी खिलाड़ियों पर प्रतिबंध

गौरतलब है कि पाकिस्तान के खिलाड़ी केवल इंडियन प्रीमियर लीग 2008 के पहले सीजन में खेले थे. इसके बाद 2008 मुंबई अटैक्स 26/11 के बाद आईपीएल में पाकिस्तानी खिलाड़ियों की भागीदारी पर प्रतिबंध लगा दिया गया था. तब से भारतीय फ्रेंचाइजी आम तौर पर विदेशी लीगों में भी पाकिस्तानी खिलाड़ियों को खरीदने से बचती है.

सुनील गावस्कर का कड़ा बयान

अब सनराइजर्स लीड्स के इस फैसले पर फैंस के बाद भारतीय दिग्गज सुनील गावस्कर ने आपत्ति चताई जताई है. उन्होंने इस फैसले की आलोचना करते हुए कहा कि भारतीय स्वामित्व वाली टीमों को ऐसे फैसलों से बचना चाहिए.

उन्होंने अपने कॉलम में लिखा कि पाकिस्तानी खिलाड़ियों को दी जाने वाली फीस अंततः उस देश की व्यवस्था में जाती है, जिससे भारत के खिलाफ इस्तेमाल होने वाले संसाधन भी जुड़ सकते हैं. इसी कारण कई भारतीय संस्थाएं पाकिस्तानी कलाकारों और खिलाड़ियों के साथ काम करने से परहेज करती हैं.

कोच की भूमिका पर भी उठे सवाल

गावस्कर ने टीम के कोच डैनियल विटोरी का भी जिक्र करते हुए कहा कि हो सकता है उन्होंने टीम संयोजन के लिहाज से पाकिस्तानी खिलाड़ियों को टीम में शामिल किया हो. लेकिन आखिरी फैसला फ्रेंचाइजी मालिक का होता है और उन्हें परिस्थितियों को समझना चाहिए था.

बीसीसीआई का रुख

इस पूरे मामले पर बीसीसीआई के उपाध्यक्ष राजीव शुक्ला ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी थी. उन्होंने स्पष्ट किया कि बोर्ड इस मामले में हस्तक्षेप नहीं कर सकता है, क्योंकि ये विदेशी लीग का मामला है. वो हमारी टेरिटरी से बाहर है.