नई दिल्ली: एक बार फिर से भारत और पाकिस्तान मुकाबले ने वही कहानी दोहराई. भारत ने एक बार फिर से पाकिस्तान को धूल चटाते हुए मुकाबले में 61 रनों से कब्जा कर लिया. भारत की इस जीत ने एक बार फिर से पाकिस्तान टीम को पोल खोल दी. हालांकि जितनी चर्चा इस मैच और भारत की जीत रही उससे भी ज्यादा चर्चा नो हैंडशेक पॉलिसी की भी रही. भारत ने मैच जीतने के साथ ही पाकिस्तान के मुंह पर तमाचा मारते हुए उनसे एक बार हाथ नहीं मिलाया. भारत के हाथ न मिलाने के फैसले ने मैच को और ड्रमैटिक बना दिया था.
जैसा की सभी जानते हैं कि भारत और पाकिस्तान आज से नहीं बल्कि बरसो से एक दूसरे के चीर प्रतिद्वंदी हैं. दोनो टीमों के बीच हमेशा से ही राइवलरी देखने को मिलती है. इस मैच में भी वह दिखा. भारत ने पाकिस्तान को हमेशा की तरह पाक को मात दी.
हालांकि चर्चा इस बात की नहीं हो रही थी कि भारत ने पाकिस्तान को हराया बल्कि इस बात की हो रही थी दोनो कप्तानों ने एक बार फिर से हाथ नहीं मिलाया. टॉस के दौरान और मैच जीतने के बाद दोनों ने एक दूसरे से हाथ नहीं मिलाया. बता दें ये परंपरा ऑपरेशन सिंदुर के बाद एशिया कप से शुरु हुई थी. जब कप्तान सूर्या ने अपनी देशभक्ति जाहिर करते हुए पाक खिलाड़ियों से हाथ नहीं मिलाया था.
बता दें पाकिस्तान टूर्नामेंट शुरु होने से पहले भारत के साथ मैच के बहिष्कार की धमकी दे रहा था. इसके बाद पाकिस्तान ने आईसीसी के सामने कई शर्ते रखी थी, जिनमें से उनकी एक शर्त यह भी थी कि भारत हर मैच में पाकिस्तान से हाथ मिलाएगा. हालांकि आईसीसी ने पाकिस्तान की किसी भी बात को मानने से इंकार कर दिया था.
पाकिस्तान ने टॉस जीतकर भारत को बल्लेबाजी के लिए आमंत्रित किया. भारत ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 20 ओवर में पाकिस्तान को जीत के लिए 176 रनों का टारगेट दिया. लक्ष्य का पीछा करने उतरी पाकिस्तान टीम शुरु से ही असहज दिखी. टीम की शुरुआत बेहद खराब रही. पहले ओवर से भी भारतीय गेंदबाजों ने अपना कमाद दिखाना शुरु कर दिया था.
हार्दिक ने पहले ओवर में पाकिस्तान के सलामी बल्लेबाज शाहिबजादा फरहान को चलता किया. उसके बाद जसप्रीत बुमराह ने अपना जादू दिखाते हुए दूसरे ओवर विकेट लिया. ऐसे ही एक के बाद एक पाकिस्तान के विकेट ताश के पत्तों की तरह से गिरते चले गए और अंत में पूरी टीम महज 114 स्कोर पर सिमट गई.