नई दिल्ली: देश के प्रतिष्ठित संस्थान आईआईएम इंदौर ने आईपीएल में धूम मचाने वाले तूफानी बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी पर एक विस्तृत रिसर्च करने का फैसला किया है. यह भारत में पहली बार हो रहा है जब किसी सक्रिय खिलाड़ी के करियर और मानसिक प्रबंधन को केस स्टडी का हिस्सा बनाया जा रहा है.
आईआईएम इंदौर के इस अनोखे कदम से खेल और प्रबंधन जगत दोनों ही बेहद उत्साहित हैं. संस्थान के खेल मनोविज्ञान प्रबंधन के जाने-माने विशेषज्ञ मिलकर इस पूरी स्टडी को तैयार करेंगे. इस अकादमिक शोध का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि इतनी छोटी उम्र में वैभव ने दबाव वाले मैचों में किस तरह संतुलन बनाए रखा. यह पहली बार है जब कोई प्रबंधन संस्थान किसी खिलाड़ी की सफलता को किताबी पाठ्यक्रम के रूप में पेश करने जा रहा है.
वैभव सूर्यवंशी मौजूदा समय में इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) में राजस्थान रॉयल्स (RR) की टीम के लिए एक भरोसेमंद और आक्रामक सलामी बल्लेबाज की भूमिका निभा रहे हैं. उन्होंने अपनी विस्फोटक बल्लेबाजी के दम पर टीम को कई महत्वपूर्ण मैचों में शानदार शुरुआत दिलाई है. मैदान पर उनकी इसी बेखौफ खेल शैली और निरंतर बेहतर प्रदर्शन ने न केवल क्रिकेट प्रशंसकों का दिल जीता, अकादमिक विशेषज्ञों को भी आकर्षित किया है.
वैभव सूर्यवंशी की इस सफलता की सबसे बड़ी गूंज आईपीएल के मौजूदा सीजन में सुनाई दी. उन्होंने इस सत्र में अपनी तूफानी बल्लेबाजी के दौरान गगनचुंबी शॉट्स खेलते हुए टूर्नामेंट के इतिहास में सबसे ज्यादा छक्के लगाने का महान बल्लेबाज क्रिस गेल का बरसों पुराना रिकॉर्ड तोड़ दिया. बेहद कम उम्र में हासिल की गई इस ऐतिहासिक उपलब्धि और उनके असाधारण बैटिंग ग्राफ के कारण ही आईआईएम ने उनके करियर को अपने शोध के लिए चुना है.
संस्थान के डायरेक्टर हिमांशु राय के अनुसार, यह केस स्टडी सिर्फ वैभव के क्रिकेट के आंकड़ों तक सीमित नहीं रहेगी. इसमें उनके सामाजिक, मनोवैज्ञानिक और संस्थागत तौर-तरीकों का बेहद बारीकी से विश्लेषण किया जाएगा. इस रिसर्च के माध्यम से यह समझने का प्रयास किया जाएगा कि एक साधारण पृष्ठभूमि से निकलकर वैश्विक पटल पर चमकने के दौरान वैभव ने अपने मानसिक तनाव को किस तरह से प्रबंधित किया और खुद को हमेशा केंद्रित बनाए रखा.
इस पूरी केस स्टडी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा वैभव सूर्यवंशी के शुरुआती संघर्ष और उनके परिवार द्वारा किए गए बड़े समर्पण और त्याग पर भी आधारित होगा. संस्थान का मानना है कि इस शोध के जरिए आने वाली पीढ़ी के युवाओं को एक ऐसा व्यावहारिक पाठ पढ़ने को मिलेगा, जिससे वे सीख सकेंगे कि सही दिशा में मेहनत कर सफलता कैसे पाई जाती है. यह अध्ययन भविष्य के युवा एथलीटों के लिए एक बेहतरीन मार्गदर्शिका साबित होगा.