'कोई सलाह नहीं ली गई...', भारतीय हॉकी टीम की जर्सी का रंग बदलने पर खिलाड़ियों ने तोड़ी चुप्पी
भारतीय हॉकी टीम की नई केसरिया जर्सी को लेकर विवाद बढ़ गया है. कई खिलाड़ियों ने कहा कि रंग बदलने से पहले उनसे कोई राय नहीं ली गई. वहीं हॉकी इंडिया का दावा है कि फैसला खिलाड़ियों और सपोर्ट स्टाफ से चर्चा के बाद हुआ.
Saffron Jersey Row: भारतीय हॉकी टीम की नई केसरिया जर्सी अब नए विवाद में आ गई है. हॉकी इंडिया जहां इसे खिलाड़ियों की सलाह के बाद लिया गया फैसला बता रहा है. वहीं कई खिलाड़ियों ने इस दावे से इनकार किया है. इससे जर्सी बदलने की पूरी प्रक्रिया पर सवाल उठने लगे हैं.
खिलाड़ियों के बयान से बढ़ा विवाद
भारतीय हॉकी टीम के कुछ खिलाड़ियों ने साफ कहा है कि नई केसरिया जर्सी का फैसला लेने से पहले उनसे कोई राय नहीं ली गई. एक रिपोर्ट के अनुसार पुरुष और महिला टीम के पांच खिलाड़ियों ने बताया कि वे इस प्रक्रिया का हिस्सा नहीं थे. खिलाड़ियों ने यह भी कहा कि वे पूरी टीम की ओर से नहीं, बल्कि अपनी जानकारी के आधार पर बात कर रहे हैं. एक खिलाड़ी ने कहा कि उनसे न तो कोई सुझाव मांगा गया और न ही इस बदलाव पर चर्चा हुई. खिलाड़ियों के इन बयानों के बाद यह मामला और चर्चा में आ गया है, क्योंकि इससे हॉकी इंडिया के आधिकारिक दावे पर सवाल उठ रहे हैं.
हॉकी इंडिया ने फैसले का किया बचाव
हॉकी इंडिया का कहना है कि जर्सी का रंग बदलने का फैसला खिलाड़ियों और सपोर्ट स्टाफ से बातचीत के बाद लिया गया. संस्था के मुताबिक, नीली जर्सी नीले हॉकी टर्फ पर साफ दिखाई नहीं देती थी, इसलिए नया रंग चुना गया. हॉकी इंडिया ने यह भी कहा कि केसरिया भारत के तिरंगे का हिस्सा है और साहस व गर्व का प्रतीक माना जाता है. संस्था ने यह भी याद दिलाया कि भारतीय टीम पहले भी अलग-अलग टूर्नामेंट में अलग रंग की जर्सी पहन चुकी है. वहीं कप्तान हरमनप्रीत सिंह ने भी नई जर्सी का समर्थन करते हुए कहा कि उन्हें इसका नया लुक पसंद आया और टीम ने ट्रेनिंग मैच में इसे पहनकर अच्छा अनुभव किया.
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फैसले की प्रक्रिया पर सवाल
इस पूरे विवाद का सबसे बड़ा मुद्दा अब जर्सी का रंग नहीं, बल्कि फैसला लेने का तरीका बन गया है. रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि हॉकी इंडिया की एग्जीक्यूटिव कमिटी के कुछ सदस्यों को भी इस बदलाव की पहले से जानकारी नहीं थी. एक सदस्य ने कहा कि वह किसी ऐसी बैठक का हिस्सा नहीं थे जिसमें इस विषय पर चर्चा हुई हो. दूसरी ओर, हॉकी इंडिया लगातार अपने फैसले को सही बता रहा है और कह रहा है कि यह बदलाव तकनीकी जरूरत और राष्ट्रीय पहचान दोनों को ध्यान में रखकर किया गया.