ट्रंप के फोन कॉल के आगे झुका फीफा, 64 साल पुराना नियम तोड़ रेड कार्ड के बाद भी मैदान पर उतरेंगे USA के फोलारिन बालोगुन
अमेरिकी स्ट्राइकर फोलारिन बालोगुन को रेड कार्ड के बाद अगले मैच से बाहर माना जा रहा था. कुछ समय बाद फीफा ने फैसला बदल दिया. कई लोगों का मानना है कि डोनाल्ड ट्रंप ने एक कॉल लगाकर ये कारनामा करके दिखाया है.
FIFA World Cup 2026 में एक नए विवाद ने जन्म ले लिया. इस विवाद में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की भूमिका सबसे बढ़ी बताई जा रही है. दरअसल, अमेरिका के स्ट्राइकर फोलारिन बालोगुन को बोस्निया और हर्जेगोविना के मैच में 64वें मिनट में रेड कार्ड मिल गए. अमेरिका का मेन स्ट्राइकर अगले मैच में आउट बताया गया लेकिन फिर ट्रंप की एंट्री हुई और सब बदल गया.
रेड कार्ड के बाद अचानक बदला फैसला
अमेरिका ने राउंड ऑफ 32 में बोस्निया और हर्जेगोविना को 2-0 से हराकर प्री-क्वार्टर फाइनल में जगह बनाई थी. इस मुकाबले में फोलारिन बालोगुन ने 45वें मिनट में गोल भी किया लेकिन मैच के दौरान उनका पैर बोस्निया के डिफेंडर तारिक मुहरेमोविच के टखने के ऊपर जा लगा. मैदान पर मौजूद रेफरी ने पहले इस घटना पर कोई बड़ी कार्रवाई नहीं की लेकिन VAR की सलाह पर उन्होंने वीडियो देखा और बालोगुन को सीधा रेड कार्ड दिखा दिया. दो दिन बाद फीफा ने भी इस फैसले को सही बताते हुए साफ किया कि नियमों के अनुसार बालोगुन अगले मैच में नहीं खेल पाएंगे. रविवार को अचानक तस्वीर बदल गई. फीफा ने घोषणा की कि बालोगुन बेल्जियम के खिलाफ मैदान पर उतर सकते हैं. हालांकि रेड कार्ड उनके रिकॉर्ड में एक साल तक रहेगा और यदि इस दौरान वह फिर ऐसा गंभीर फाउल करते हैं तो एक मैच का निलंबन तुरंत लागू हो जाएगा. इसी फैसले ने पूरे मामले को नया मोड़ दे दिया.
ट्रंप का नाम कैसे जुड़ा?
फैसले के बाद सबसे ज्यादा चर्चा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की एंट्री की हो रही है. कुछ विदेशी मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया कि ट्रंप ने फीफा अधिकारियों को लगातार फोन कॉल किए. उन्होंने बालोगुन पर लगा प्रतिबंध हटाने की अपील की. हालांकि फीफा और व्हाइट हाउस ने इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है. ट्रंप ने सोशल मीडिया पर जरूर लिखा कि फीफा ने सही फैसला लिया है. फीफा ने इस मामले में अपने अनुशासनात्मक नियमों के आर्टिकल 27 का इस्तेमाल किया. इस नियम के तहत न्यायिक समिति विशेष परिस्थितियों में किसी सजा को पूरी तरह या आंशिक रूप से रोक सकती है. यही वजह बताई जा रही है कि एक मैच का प्रतिबंध फिलहाल लागू नहीं किया गया. इससे पहले इसी विश्व कप में क्रिस्टियानो रोनाल्डो के मामले में भी इसी नियम का इस्तेमाल कर उनके निलंबन की अवधि कम की गई थी.
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बेल्जियम की नाराजगी
फीफा के इस फैसले से बेल्जियम फुटबॉल संघ ने खुलकर नाराजगी जताई है. उसका कहना है कि सभी टीमों को पहले ही बताया गया था कि सीधे रेड कार्ड मिलने पर अगला मैच अपने आप छूट जाएगा. ऐसे में बीच टूर्नामेंट नियमों की अलग व्याख्या करना खेल की निष्पक्षता पर सवाल खड़ा करता है. बेल्जियम अब कानूनी विकल्पों पर भी विचार कर रहा है. अगर ऐसा होता है तो यह मामला सिर्फ बालोगुन तक सीमित नहीं रहेगा. भविष्य में रेड कार्ड, VAR और अनुशासनात्मक नियमों को लेकर नई बहस शुरू हो सकती है. अब सभी की नजर अमेरिका और बेल्जियम के बीच होने वाले प्री-क्वार्टर फाइनल पर है.