'न रोड, न गैस, न बिजली, न यूनिवर्सिटी, मेरे गांव की बदल दो तकदीर,' पाकिस्तान सरकार से अरशद नदीम की गुहार
अरशद नदीम, पाकिस्तान के मियां चन्नू तहसील के रहने वाले हैं. पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में यह एक छोटी सी जगह है. उनकी तहसील में विकास की रफ्तार मद्धम पड़ी है. बच्चों को पढ़ाई के लिए मुल्तान जाना पड़ता है, जो उनके गांव से दो घंटे की दूरी पर है. पेरिस ओलंपिक 2024 में जैवलिन में गोल्ड मेडल जीतने के बाद अरशद नदीम ने कहा है कि पाकिस्तानी सरकार से अपील कर रहे हैं कि उनके गांव का विकास किया जाए.
दुनिया को जैवलिन थ्रो का नया सितारा मिल गया है. पाकिस्तान के अरशद नदीम ने पेरिस ओलंपिक 2024 में जैवलिन कंपटीशन में सफलता के झंडे गाड़ दिए हैं. उनके नाम की दुनियाभर में धूम मची है. पाकिस्तान में दशकों से गोल्ड मेडल का सूखा पड़ा था, जिसकी कमी, अरशद नदीम ने पूरी कर दी है. एक खेलों में पाकिस्तान की मिली, पहली बड़ी कामयाबी है. पाकिस्तान सरकार भी अरशद नदीम पर निहाल है और उन्हें अलग-अलग तरीके से सम्मानित कर रही है. अरशद नदीम नेओलंपिक में 92.97 मीटर जैवलिन फेंका है, जो अपने आप में एक रिकॉर्ड है.
पाकिस्तान का दुनिया में नाम रोशन करने के बाद अब अरशद नदीम ने अपनी सरकार से कुछ मांगा है. अरशद नदीम ने कहा है कि उनकी तहसील मियां चन्नू का विकास किया जाए, जिससे एक बड़े तबके को लाभ पहुंचे. इस इलाके में प्रशासनिक उपेक्षा की वजह से विकास कम हुआ है. जब ओलंपिक जीतकर अरशद नदीम अपने गांव पहुंचे तो उन्होंने पाकिस्तानी मीडिया के हवाले से सरकार से गुहार लगाई कि उनकी मदद की जाए.
सरकार से क्या चाहते हैं अरशद नदीम?
अरशद नदीम ने कहा, 'मेरे गांव में सड़कों की जरूरत है. अगर सरकरा हमें गैस दे दे, यह मेरे गांव और मेरे लिए अबहुत अच्चा होगा. मेरा यह भी सपना है कि मियां चन्नू शहर में एक विश्वविद्यालय बने, जिससे हमारी बहनों को पढ़ने के लिए मुल्तान न जाना पड़े. वहां पहुंचने में डेढ़ से दो घंटे लगते हैं. अगर सरकार यहां यूनिवर्सिटी बनवा दे तो यह मेरे गांव के लिए और पड़ोसियों के लिए अच्छी खबर होगी.'
'गरीब परिवार लेकिन हौसले बुलंद, पाकिस्तान की शान बने अरशद नदीम'
अरशद नदीम ने पाकिस्तानी सरकार को शुक्रिया भी कहा. उन्होंने कहा कि वे एहसानमंद हैं कि पाकिस्तानी सरकार ने उन्हें इतना सपोर्ट किया जिससे वे ये मुकाम हासिल कर सके हैं. अरशद नदीम एक मजदूर के बेटे हैं, उन्होंने बेहद कठिन समय देखा है. लोगों ने पैसे ले-लेकर वे खेलों में पहुंचे हैं. लोगों की मदद से ही वे भाला खरीद पाए थे. कुछ महीने पहले उन्होंने अधिकारियों से गुहार लगाई थी कि उन्हें एक नया जैवलिन दिया जाए, जिससे वे खेल सें. उन्होंने पेरिस ओंलपिक 2024 में कमाल किया है और नीरज चोपड़ा को पीछे छोड़कर गोल्ड मेडल हासिल कर लिया है.