Ayodhya Ke Ram: वनवास के दौरान इन जंगलों में रहे थे भगवान राम, जानें कहां है ये वन!
Ayodhya Ke Ram: भगवान राम ने अपने जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा जंगलों में व्यतित किया था. ऐसा माना जाता है कि प्रभु राम की असली परीक्षा जंगलों में ही हुई और ये उनके जीवन का अभिन्न अंग रहा. भगवान ने चौदह वर्ष वनवास के दौरान जंगलों में ही बिताया था. इस दौरान प्रभु राम ने दण्डक वन में भी बिताया. जिसे रामायण और राम चरित मानस का एक पावन अध्याय माना जाता है. ये दण्डक वन देश के कई हिस्सों में फैलें हुए हैं. आइए जानते हैं इन दण्डक वन के बारे में...
दण्डकारण्य क्षेत्र
दण्डकारण्य क्षेत्र मुख्य रूप से महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, ओडिशा, आंध्र प्रदेश में है. यहां के नदी, पहाड़, जंगल आदि क्षेत्रों में भगवान ने वनवास के दौरान समय बिताया था.
इन प्रदेशों में फैले हैं जंगल
इसको लेकर विद्वानों का मत है कि दण्डक वन वर्तमान में मध्य प्रदेश के सतपुड़ा की पहाड़ियों में स्थित है. इन पहाड़ियों में कई घने जंगल और बहुत से दुर्गम रास्ते हैं.
सीता गुफा, छत्तीसगढ़
छत्तीसगढ़ के चित्रकोट में एक गुफा स्थित है. यहां ऐसी मान्यता है कि सीता माता ने वनवास के दौरान अपना समय व्यतित किया था.
पंचवटी, नासिक
महाराष्ट्र के नासिक में स्थित एक पवित्र जंगल स्थित है. यहां पर माता सीता, प्रभु राम और लक्ष्मण ने समय बिताया था. ऐसा बताया जाता है कि यहीं से माता सीता का हरण हुआ था.
जटायु-रावण युद्ध स्थान
आंध्र प्रदेश के दुम्मगुडेम इलाके में वह जंगल स्थित है. जहां पर सीता हरण के बाद माता सीता का बचाव करने गए राम भक्त जटायु का रावण ने वध कर दिया था. जिसके बाद प्रभु राम ने जटायु का अंतिम संस्कार किया था.
अमरकंटक
मध्य प्रदेश स्थित अमरकंटक की पहाड़ी पर प्रभु राम ने अपना समय बिताया था. यहां पर मां नर्मदा, सोन और महानदी जैसे नदियों के उद्गम स्थल को भी भगवान ने पार किया था.
पंचमढ़ी
मध्य प्रदेश स्थित पंचमढ़ी को हिल स्टेशन के तौर पर जाना जाता है. ऐसी मान्यता है कि यहां भी भगवान ने समय बिताया था.
सुग्रीव-राम की मित्रता
दण्डक वन में ही वानर राजा सुग्रीव से प्रभु श्री राम की भेंट हुई थी. सुग्रीव की वानर सेना के सहयोग से ही भगवान राम ने लंका पर विजय पर प्राप्त की थी.
माता शबरी की भक्ति
भगवान राम के वनवास के दौरान सबसे महत्वपूर्ण भाग माता शबरी और प्रभु राम की भेंट को माना जाता है. क्योंकि इस भेंट में प्रभु राम ने शबरी के जुठे बैर खाए थे. ये केवल इसलिए हुआ क्योंकि शबरी प्रभु की अन्नय भक्त थी. शबरी की भक्ति और समर्पण सच्ची निष्ठा का प्रतिक है.