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हर तीसरा बच्चा खतरे में...! जंक फूड की आदत बना रही बच्चों को बीमार, छुपके से बढ़ रही है ये बीमारी

वर्ल्ड लिवर डे 2026 पर एक्सपर्ट ने चेतावनी दी है कि बच्चों में फैटी लिवर तेजी से बढ़ रहा है. खराब खानपान और कम एक्टिविटी इसकी बड़ी वजह हैं. समय रहते सही आदतें अपनाकर इस बीमारी से बचा जा सकता है.

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Babli Rautela

हर साल 19 अप्रैल को वर्ल्ड लिवर डे मनाया जाता है ताकि लोगों को लिवर की सेहत के प्रति जागरूक किया जा सके. साल 2026 की थीम सॉलिड हैबिट्स स्ट्रॉन्ग लिवर रखी गई है. लिवर हमारे शरीर का एक बेहद जरूरी अंग है जो भोजन पचाने, शरीर से विषैले तत्व बाहर निकालने और ऊर्जा देने जैसे कई अहम काम करता है. लेकिन अक्सर लोग इसकी सेहत को नजरअंदाज कर देते हैं. एक्सपर्ट के अनुसार अब फैटी लिवर रोग केवल बड़ों तक सीमित नहीं रही. यह तेजी से बच्चों को भी अपनी चपेट में ले रही है. 

इंद्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल के डॉक्टरों का कहना है कि हर 3 में से 1 भारतीय बच्चा इस समस्या से प्रभावित हो सकता है. यह आंकड़ा बेहद चिंताजनक है क्योंकि पहले यह बीमारी ज्यादातर वयस्कों में ही देखी जाती थी. चौंकाने वाली बात यह है कि कई बार बच्चे देखने में बिल्कुल स्वस्थ लगते हैं, लेकिन उनके लिवर में धीरे धीरे फैट जमा होता रहता है.

भारत में ज्यादा क्यों बढ़ रहा है यह खतरा

भारत में इस बीमारी के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं. आंकड़ों के मुताबिक हर 100 में से करीब 35 बच्चे इस समस्या से जूझ रहे हैं. दुनिया के मुकाबले यह आंकड़ा लगभग 4 गुना ज्यादा है. इसका सबसे बड़ा कारण बदलती लाइफस्टाइल है. जंक फूड, मीठे पेय, ज्यादा स्क्रीन टाइम और कम फिजिकल एक्टिविटी बच्चों के लिवर को कमजोर बना रहे हैं.

पहले माना जाता था कि यह समस्या केवल मोटापे से जुड़ी है. लेकिन अब विशेषज्ञों का कहना है कि सामान्य वजन वाले बच्चों में भी यह बीमारी देखी जा रही है. इसका मतलब है कि केवल वजन देखकर यह तय नहीं किया जा सकता कि बच्चा सुरक्षित है या नहीं.

क्यों खतरनाक है फैटी लिवर?

फैटी लिवर की सबसे बड़ी समस्या यह है कि इसके शुरुआती लक्षण नजर नहीं आते. यह बीमारी धीरे धीरे बढ़ती है और जब तक इसका पता चलता है, तब तक स्थिति गंभीर हो सकती है. अगर समय रहते इसका इलाज नहीं किया गया तो यह आगे चलकर बड़ी लिवर बीमारियों में बदल सकती है. एक्सपर्ट का मानना है कि यह बीमारी काफी हद तक लाइफस्टाइल से जुड़ी है. इसलिए माता पिता को बच्चों की आदतों पर ध्यान देना होगा. सही खानपान और नियमित एक्टिविटी से इस खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है.

बचाव के लिए अपनाएं ये 4 जरूरी आदतें

  • सबसे पहले बच्चों को बैलेंस डाइट दें जिसमें साबुत अनाज और प्रोटीन शामिल हो.
  • दूसरा बच्चों को रोजाना कम से कम 30 मिनट एक्सरसाइज या आउटडोर खेल के लिए प्रेरित करें.
  • तीसरा मीठे पेय और जंक फूड से दूरी बनाएं.
  • चौथा अगर बच्चे को मोटापा या डायबिटीज जैसी समस्या है तो समय समय पर जांच जरूर कराएं.