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दुनिया ने बनाई दूरी, लेकिन भारत ने बढ़े शराब के शौकीन, इस राज्य में सबसे ज्यादा शराबी

दुनिया में शराब की खपत लगातार घट रही है, लेकिन भारत में इसका उल्टा रुझान दिख रहा है. जहां ग्लोबल ब्रांड्स नुकसान झेल रहे हैं, वहीं भारत का शराब बाजार तेजी से बढ़कर 60 अरब डॉलर का हो चुका है.

Kuldeep Sharma
Edited By: Kuldeep Sharma
दुनिया ने बनाई दूरी, लेकिन भारत ने बढ़े शराब के शौकीन, इस राज्य में सबसे ज्यादा शराबी
Courtesy: social media

दुनिया भर में शराब पीने की आदतों में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है. जहां विकसित देश स्वास्थ्य जागरूकता, महंगाई और नई जीवनशैली के चलते शराब से दूरी बना रहे हैं, वहीं भारत में इसका चलन लगातार बढ़ रहा है.

‘ब्लूमबर्ग’ की रिपोर्ट के मुताबिक, ग्लोबल लिकर कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट आई है, लेकिन भारत का शराब बाजार नए रिकॉर्ड बना रहा है. भारत अब दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते शराब उपभोक्ता देशों में शामिल हो गया है.

गिरावट का क्या है कारण है?

पिछले चार वर्षों में शराब की वैश्विक खपत में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है. स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती जागरूकता, बदलती जीवनशैली और बढ़ती महंगाई ने लोगों को शराब से दूर कर दिया है. नतीजतन, अंतरराष्ट्रीय पेय कंपनियां अब बिना अल्कोहल वाले विकल्पों की ओर बढ़ रही हैं. डियाजियो ने हाल ही में 'रिचुअल जीरो प्रूफ' खरीदी है, जो अल्कोहल-फ्री स्पिरिट बनाती है. कार्ल्सबर्ग और कैमपारी-मिलानो ने भी इसी तरह के 'जीरो प्रूफ' ब्रांड लॉन्च किए हैं.

शराब निर्माताओं के लिए आंकड़े कितने खराब?

‘ब्लूमबर्ग’ के अनुसार, जून 2021 से अब तक दुनिया की 50 प्रमुख शराब कंपनियों के शेयर औसतन 46 प्रतिशत तक गिर चुके हैं. डियाजियो, पर्नोद रिकार्ड, रेनी कॉइंट्रो और ब्राउन-फॉर्मन जैसी कंपनियों के मार्केट वैल्यू से करीब 830 अरब डॉलर की कमी हुई है. विश्लेषकों का मानना है कि बिक्री में गिरावट, बढ़ते कर्ज और प्रबंधन में बदलाव के कारण यह मंदी कुछ समय तक जारी रह सकती है.

कैसे बदल रही हैं शराब पीने की आदतें?

दुनियाभर में शराब पीने की आदतें तेजी से बदल रही हैं. अगस्त में जारी 'गैलप पोल' के अनुसार, अमेरिका में शराब पीने की दर 1939 के बाद अपने न्यूनतम स्तर पर है. डब्ल्यूएचओ और अमेरिकी सर्जन जनरल की चेतावनियों ने भी शराब की मांग घटाई है. खासतौर पर जनरेशन एक्स, मिलेनियल्स और जेन-Z अब फिटनेस और वेलनेस को प्राथमिकता दे रहे हैं.

पॉप संस्कृति कैसे कर रही प्रभावित?

अब पॉप कल्चर भी 'सॉबर' यानी बिना शराब वाली जीवनशैली को बढ़ावा दे रहा है. हॉलीवुड अभिनेता टॉम हॉलैंड और गायिका कैटी पेरी जैसे सितारे बिना अल्कोहल वाले पेय ब्रांड्स का समर्थन कर रहे हैं. साथ ही वजन घटाने वाली GLP-1 दवाओं जैसे ओजेम्पिक और कैनाबिस जैसे विकल्पों के चलन ने पारंपरिक शराब बाजार को कमजोर किया है.

इस वैश्विक गिरावट में भारत अपवाद क्यों?

दुनिया शराब से दूरी बना रही है, लेकिन भारत इसका अपवाद है. यहां प्रति व्यक्ति शराब खपत 2005 में 2.4 लीटर से बढ़कर 2016 में 5.7 लीटर हो गई और 2030 तक 6.7 लीटर पहुंचने का अनुमान है. भारत का शराब बाजार अब 60 अरब डॉलर का है. यूनाइटेड स्पिरिट्स, रैडिको खेतान और ग्लोबस स्पिरिट्स के शेयर चार साल में 14 गुना तक बढ़े हैं. वहीं, राज्य सरकारों को शराब बिक्री से 19,730 करोड़ रुपये का राजस्व मिला है.

कौन से राज्य दे रहे बढ़ावा?

मध्य प्रदेश और राजस्थान जैसे राज्यों में शराब की खपत में अभूतपूर्व बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है. मध्य प्रदेश में 2021-22 के 245.3 मिलियन लीटर से बढ़कर 2024-25 में 456.4 मिलियन लीटर की बिक्री हुई है, यानी 86 प्रतिशत की वृद्धि. राजस्थान में भी 235.9 मिलियन लीटर से बढ़कर 304.2 मिलियन लीटर तक पहुंच गई, जो 29 प्रतिशत की बढ़त दर्शाती है.

भारत में शराब की बढ़ती मांग के पीछे क्या कारण है?

भारत में 60 प्रतिशत आबादी 35 वर्ष से कम उम्र की है, जो शराब बाजार की सबसे बड़ी उपभोक्ता श्रेणी बन रही है. डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले दो दशकों में भारतीय महिलाओं में शराब सेवन 50 प्रतिशत बढ़ा है. ‘स्टैटिस्टा’ और ‘रिपोर्टलिंकर’ के शोध बताते हैं कि औसत आय में 30 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जबकि प्रीमियम शराब की मांग हर साल 18 प्रतिशत की दर से बढ़ रही है.

बड़ी तस्वीर क्या है?

दुनियाभर में शराब कंपनियां अपने मूल्य गंवा रही हैं, क्योंकि उपभोक्ता संयम की ओर बढ़ रहे हैं. लेकिन भारत में युवा आबादी और बढ़ती आय ने शराब उद्योग को नई ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया है- जहां बाकी दुनिया 'स्पिरिट्स' को नीचे रख रही है, वहीं भारत अब 'स्पिरिट्स' को ऊंचा उठा रहा है.