सिर पर मटका और दांतों में तलवार, 13 मंजीरों की थाप पर थिरकती हैं महिलाएं; ऐसे होता है राजस्थान का तेरह ताली का अद्भुत डांस
तेरह ताली राजस्थान का अनोखा लोक नृत्य है, जिसका संबंध कामड़ समुदाय और बाबा रामदेव जी की भक्ति से माना जाता है. इसमें महिला कलाकार शरीर पर 13 मंजीरे बांधकर जमीन पर बैठकर नृत्य करती हैं.
नई दिल्ली: सिर्फ घूमर और कालबेलिया ही नहीं, राजस्थान की लोक संस्कृति में कई ऐसे नृत्य हैं, जो अपनी अनोखी परंपरा और कला के लिए पूरी दुनिया में पहचान रखते हैं. इन्हीं में से एक है तेरह ताली नृत्य. यह नृत्य अपनी खास लय, कठिन संतुलन और मंजीरों के अनोखे इस्तेमाल के कारण बेहद आकर्षक माना जाता है. तेरह ताली नृत्य का संबंध राजस्थान के कामड़ समुदाय से माना जाता है और इसका गहरा जुड़ाव बाबा रामदेव जी की भक्ति से है.
तेरह ताली नृत्य की शुरुआत कामड़ समुदाय की धार्मिक परंपराओं से जुड़ी मानी जाती है. कामड़ समुदाय बाबा रामदेव जी को आराध्य मानता है. उनकी भक्ति और धार्मिक अनुष्ठानों के दौरान इस नृत्य को प्रस्तुत करने की परंपरा विकसित हुई. समय के साथ यह नृत्य राजस्थान की लोक संस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया. तेरह मंजीरों के इस्तेमाल के कारण इसे तेरह ताली नाम मिला.
क्या है इस नृत्य की सबसे खास बात?
इस नृत्य की सबसे खास बात इसका अनोखा तरीका है. महिला कलाकार अपने शरीर के अलग-अलग हिस्सों पर कुल 13 मंजीरे बांधती हैं. इनमें पैरों, हाथों और कोहनी सहित शरीर के अलग-अलग हिस्सों पर मंजीरे लगाए जाते हैं. इसके अलावा एक या अधिक मंजीरे हाथों में रखे जाते हैं. नर्तकियां हाथ में पकड़े मंजीरों को शरीर पर बंधे मंजीरों से टकराकर ताल पैदा करती हैं. इससे मंजीरों की तेज और मधुर आवाज के साथ एक खास लय बनती है.
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कैसे देती हैं महिलाएं प्रस्तुति?
तेरह ताली नृत्य में महिला कलाकार जमीन पर बैठकर प्रस्तुति देती हैं. वहीं पुरुष कलाकार तंबूरा और ढोलक जैसे पारंपरिक वाद्य यंत्र बजाते हैं और बाबा रामदेव जी के भजन गाते हैं. इस तरह भक्ति संगीत और नृत्य का सुंदर मेल देखने को मिलता है.
और क्या है खासियत?
इस नृत्य को खास बनाने वाली एक और चीज इसका कठिन संतुलन है. कई प्रस्तुतियों में महिला कलाकार सिर पर पानी से भरा मटका रखकर और दांतों में तलवार या कृपाण दबाकर संतुलन बनाते हुए नृत्य करती हैं. जमीन पर बैठे-बैठे शरीर की अलग-अलग मुद्राओं और तेज गति से मंजीरे बजाना आसान नहीं होता. इसके लिए लंबे अभ्यास और शानदार संतुलन की जरूरत होती है.
कैसी होती है वेशभूषा?
तेरह ताली नृत्य में कलाकार पारंपरिक राजस्थानी वेशभूषा पहनती हैं. चमकीले घाघरा-चोली, ओढ़नी और पारंपरिक आभूषण उनकी प्रस्तुति को और आकर्षक बनाते हैं. यह नृत्य केवल मनोरंजन नहीं बल्कि राजस्थान की धार्मिक आस्था, लोक परंपरा और सांस्कृतिक विरासत को भी दर्शाता है. यही वजह है कि तेरह ताली आज राजस्थान की अनोखी लोक कलाओं में अपनी अलग पहचान बनाए हुए है.