नई दिल्ली: शादी जिंदगी का सबसे बड़ा और भावनात्मक मोड़ होता है. हर लड़की चाहती है कि उसका यह सफर खूबसूरत और यादगार बने, लेकिन इसी सोच के साथ कई बार मन में डर और बेचैनी भी घर कर जाती है. कई दुल्हनें इतनी ज्यादा घबरा जाती हैं कि उन्हें अस्पताल जाना पड़ जाता है.
परिवार, रिश्ते, नई जगह और जिम्मेदारियों को लेकर मन में उठते सवाल एंजायटी की वजह बनते हैं. अच्छी बात यह है कि थोड़ी समझदारी और सही आदतों से इस तनाव को काबू में किया जा सकता है.
शादी से पहले सबसे जरूरी है खुद से खुलकर बात करना. अपनी घबराहट को नजरअंदाज करने के बजाय यह समझना जरूरी है कि डर किस बात का है. जब आप अपनी भावनाओं को पहचानती हैं, तो समाधान अपने आप मिलने लगता है. मन की बात किसी भरोसेमंद दोस्त या परिवार के सदस्य से साझा करना भी मानसिक बोझ को हल्का करता है.
खुद के लिए समय निकालना एंजायटी कम करने का असरदार तरीका है. शादी की तैयारियों में अक्सर दुल्हन खुद को भूल जाती है. रोजाना कुछ वक्त ऐसा रखें, जिसमें आप पसंदीदा म्यूजिक सुनें, किताब पढ़ें या हल्की वॉक करें. यह छोटी आदतें दिमाग को शांत रखने में बड़ी भूमिका निभाती हैं.
परफेक्शन का दबाव छोड़ना भी बेहद जरूरी है. हर चीज परफेक्ट हो, यह सोच ही तनाव की सबसे बड़ी वजह बनती है. याद रखें कि शादी एक रिश्ता है, कोई प्रतियोगिता नहीं. छोटी-मोटी कमियां सफर को खराब नहीं करतीं, बल्कि इंसानियत को दिखाती हैं.
अपनी सेहत और नींद पर ध्यान देना एंजायटी को काफी हद तक कम कर सकता है. अनियमित खानपान और नींद की कमी मानसिक तनाव को बढ़ा देती है. संतुलित आहार, पर्याप्त पानी और पूरी नींद आपको भावनात्मक रूप से मजबूत बनाती है.
सबसे अहम है आने वाले बदलावों को खुले मन से स्वीकार करना. शादी के बाद जिंदगी बदलेगी, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि सब कुछ कठिन होगा. सकारात्मक सोच और खुद पर भरोसा दुल्हन बनने के इस सफर को डर नहीं, बल्कि आत्मविश्वास से भर देता है.