छठ पूजा के बाद बचे हुए गन्नों से बनाएं ये लजीज डिश, खाते ही आ जाएगा मजा; पढ़ें रेसिपी

गन्ना, छठ पूजा का अहम हिस्सा माना जाता है. अगर छठ पूजा के बाद कुछ गन्ने बच गए हैं तो आप एक टेस्टी डिश बना सकती है.

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Princy Sharma

नई दिल्ली: छठ पूजा भारत के सबसे आध्यात्मिक और बड़े त्योहारों में से एक है, जिसे गहरी आस्था और खुशी के साथ मनाया जाता है. इस त्योहार के दौरान, लोग खास प्रसाद तैयार करते हैं जिसमें लौकी, ठेकुआ, ताजे फल और गन्ना शामिल होता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि गन्ना छठ का एक अहम हिस्सा सिर्फ भक्ति का प्रतीक ही नहीं है, बल्कि आपकी सेहत के लिए एक सुपरफूड भी है?

क्या है गन्ने के फायदे?

गन्ना और उसका जूस कई हेल्थ बेनिफिट्स देता है. यह शरीर को हाइड्रेट रखता है, डाइजेशन में मदद करता है और पेट को ठंडा रखने में मदद करता है. गन्ने में मौजूद फाइबर पेट की सेहत को भी बेहतर बनाता है और कब्ज से बचाता है. आप इसे चबाकर, इसका जूस पीकर या अपनी डाइट में क्रिएटिव तरीकों से शामिल करके भी इसका मजा ले सकते हैं. छठ के दौरान गन्ने को शामिल करने का एक पारंपरिक और स्वादिष्ट तरीका है 'गन्ने के रस के चावल' बनाना. यह रेसिपी आसान है और स्वाद और एनर्जी से भरपूर है. 

  1. सबसे पहले कुछ चावल धोकर 15-20 मिनट के लिए भिगो दें.
  2. ताजा गन्ने का रस निकालकर एक पैन में डालें.
  3. इसे तब तक धीरे-धीरे उबालें जब तक गंदगी ऊपर न आ जाए, फिर उन्हें चम्मच से निकाल दें.
  4. जब रस साफ हो जाए तो भीगे हुए चावल डालें और धीमी आंच पर नरम होने तक पकाएं.
  5. दूसरे पैन में थोड़ा घी गरम करें, सूखे मेवों को सुनहरा होने तक भूनें और उन्हें पके हुए चावल में मिला दें.

ये लोग ने करें डिश का सेवन

आपका मीठा, खुशबूदार और हेल्दी 'गन्ने के रस के चावल' परोसने के लिए तैयार है. कई एक्सपर्ट का मानना है कि गन्ने का शरीर पर ठंडा असर होता है, जिससे यह गर्म मौसम में खास तौर पर फायदेमंद होता है. इसमें नैचुरल ग्लूकोज भरपूर होता है, जो तुरंत एनर्जी देता है और थकान से लड़ने में मदद करता है. हालांकि, वह चेतावनी देती हैं कि डायबिटीज वाले लोगों को इससे बचना चाहिए, क्योंकि इसमें नैचुरली शुगर की मात्रा ज्यादा होती है.

Disclaimer: यहां दी गई सभी जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. theindiadaily.com इन मान्यताओं और जानकारियों की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह ले लें.