खाने के बाद टहलना लंबे समय से हेल्थ एक्सपर्ट्स की सलाह का हिस्सा रहा है. माना जाता है कि इससे पाचन सुधरता है और ब्लड शुगर कंट्रोल में रहता है. लेकिन अब इस सोच को एक नई चुनौती मिली है. टेक उद्यमी ब्रायन जॉन्सन ब्रायन जॉनसन ने हाल ही में एक अलग नजरिया पेश किया है. उनका कहना है कि छोटी-छोटी लेकिन इंटेंस एक्सरसाइज, जैसे स्क्वैट्स, लंबे समय तक चलने से ज्यादा फायदेमंद हो सकती हैं.
ब्रायन जॉनसन ने 9 अप्रैल को अपने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि “10 स्क्वैट्स, 30 मिनट की वॉक से बेहतर हैं.” उनका कहना है कि हर 45 मिनट में कुछ स्क्वैट्स करने से शरीर ब्लड शुगर को ज्यादा प्रभावी तरीके से कंट्रोल करता है. यह दावा पारंपरिक सोच से अलग है, जहां डॉक्टर आमतौर पर खाने के बाद लगातार 30 मिनट चलने की सलाह देते रहे हैं. जॉनसन का फोकस इस बात पर है कि शरीर की प्रतिक्रिया केवल एक्सरसाइज की अवधि पर नहीं, बल्कि उसकी तीव्रता और आवृत्ति पर भी निर्भर करती है.
इस दावे के पीछे की साइंस मांसपेशियों के काम करने के तरीके से जुड़ी है. जॉनसन के मुताबिक, जांघ और हिप्स की मांसपेशियां शरीर में ग्लूकोज को सोखने का सबसे बड़ा माध्यम होती हैं. जब इन्हें बार-बार एक्टिव किया जाता है, तो ये खून से ज्यादा ग्लूकोज खींचती हैं. स्क्वैट्स जैसे व्यायाम इन बड़ी मांसपेशियों को तेजी से सक्रिय करते हैं, जिससे तुरंत ऊर्जा की जरूरत होती है. इसके मुकाबले, धीमी और लगातार वॉक में यह प्रभाव उतना तेज नहीं होता.
इस विचार को 2024 की एक रिसर्च भी सपोर्ट करती है, जिसमें बताया गया कि लंबे समय तक बैठे रहने के बीच छोटे-छोटे ब्रेक लेना फायदेमंद होता है. रिसर्च में पाया गया कि हर 45 मिनट में 3 मिनट की हल्की वॉक या स्क्वैट्स करने से ब्लड शुगर कंट्रोल बेहतर होता है, बजाय एक बार में 30 मिनट चलने के. खासतौर पर, जब मांसपेशियों की एक्टिविटी ज्यादा होती है, तो ग्लाइसेमिक कंट्रोल भी बेहतर होता है. यानी फर्क केवल मूवमेंट का नहीं, बल्कि उसके प्रकार और इंटेंसिटी का भी है.
आज के समय में, जब ज्यादातर लोग लंबे समय तक बैठे रहते हैं, यह नया तरीका काफी उपयोगी हो सकता है. अब केवल एक बार एक्सरसाइज करने के बजाय, दिनभर में छोटे-छोटे मूवमेंट्स को शामिल करना ज्यादा असरदार माना जा रहा है. इसका मतलब यह नहीं कि वॉक करना गलत है, बल्कि यह कि उसे और बेहतर बनाने के लिए बीच-बीच में एक्टिव रहना जरूरी है. यह तरीका खासकर उन लोगों के लिए फायदेमंद हो सकता है, जिनके पास लंबी एक्सरसाइज के लिए समय नहीं होता.