उठने के बाद भी नहीं छोड़ पा रहे बिस्तर? इन 6 जापानी तकनीकों से दूर करें आलस
अगर आप भी उठने के कई घंटों के बाद तक बिस्तर नहीं छोड़ पाते हैं और आलस आपको घेरे रहता है तो आज हम आपको कुछ खास जापानी तकनीक बताएंगे, जिससे आलस हमेशा के लिए गायब हो जाएगा.
आधुनिक जीवन में लोगों के लिए आलस एक बहुत बड़ी समस्या बन गई है. हर एक मिनट का महत्व है और यह बात सभी को पता है लेकिन अगर फिर भी आप आलस कर रहे हैं तो यह आपके लिए नुकसानदेह हो सकता है. आज हम आपको आलस दूर करने के लिए कुछ खास जापानी तकनीकें बताएंगे.
जापान में आलस को व्यक्तिगत कमजोरी नहीं, बल्कि थकान, तनाव या जीवन में असंतुलन का संकेत माना जाता है. जापानी दर्शन मेहनत से ज्यादा छोटे-छोटे बदलावों, निरंतरता और संतुलन पर जोर देते हैं. तो चलिए जानते हैं ऐसे जापानी तकनीकों के बारे में जो आपको एक-एक कदम आगे बढ़ने में मदद कर सकते हैं.
कैजन
कैजन का मतलब लगातार सुधार होता है. जापानी संस्कृति में रातोंरात बदलाव की बजाय रोजाना छोटे सुधारों पर जोर दिया जाता है. अगर जिम जाना मुश्किल लग रहा है तो पांच मिनट की सैर से शुरू करें. किताब पूरी नहीं हो पा रही तो एक पन्ना पढ़ लें. इस तरह से आपकी छोटी- छोटी आदतें समय के साथ बड़ी उपलब्धियों में बदल जाएंगी और फिर आपको काम करने के लिए मोटिवेशन भी मिलेगा.
इकीगाई
इकीगाई यानी जिनने का कारण होता है. यह सवाल आपको हर रोज सुबह बिस्तर से उठने की प्रेरणा देता है. जापानी लोग अपने दैनिक कार्यों को परिवार, रचनात्मकता, सीखना या समाज से जोड़कर उद्देश्यपूर्ण बनाते हैं. इकीगाई अपनाने से मुश्किल दिनों में भी काम शुरू करना आसान हो जाता है.
हारा हाची बु
लोग कभी-कभी इतना ज्यादा मेहनत करते हैं कि वे थक जाते हैं और फिर रुक जाते हैं. ऐसा नहीं करना है, यह सिद्धांत कहता है कि आप केवल 80 प्रतिशत तक ही अपने पेट को भरें. इसका मतलब केवल भोजन से नहीं है, बल्कि काम और जिम्मेदारियों से भी है. आप केवल इतना ही काम की जिम्मेदारी उठाएं. ऐसा करने से बर्नाउट नहीं होंगा.
सेइरी और सेइटन
जापान में यह सिद्धांत काफी फेमस है. सेइरी का मतलब अनावश्यक चीजों को हटाना और सेइटन का अर्थ है जरूरी चीजों को सही जगह व्यवस्थित करना होता है. कहने का मतलब है कि अव्यवस्थित चीजों से मन अशांत होता है, इसलिए मन की शांति के लिए और ध्यान को केंद्रित करने के लिए इस टेक्निक को अपना सकते हैं.
जापानी पोमोडोरो
इस जापानी टेक्निक में 25 मिनट तक लगातार काम और फिर 5 मिनट का ब्रेक लेने के लिए कहा जाता है. ऐसे में बड़े-बड़े काम भी आसानी से पूरे हो जाते हैं. इसके लिए आपको खुद को कंट्रोल करने की जरूरत होती है.
किंट्सुगी माइंडसेट
किंट्सुगी जापानी कला है. जिसमें टूटे बर्तनों को सोने से जोड़कर उनकी दरारों को सुंदर बनाया जाता है. इसका मतलब है कि अपनी गलतियों और असफलताओं से घबरा कर रुकने और छिपने के बजाए उस पर काम करने से आपके अंदर कभी भी आलस और डर नहीं आएगा.