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Inspiring Journey: 13 असफलताएं, कभी रिजल्ट लिस्ट से गायब था नाम; आज विदेश मंत्रालय में ASO हैं विशाल तिवारी

विशाल तिवारी की सरकारी नौकरी तक पहुंचने की कहानी बार बार मिली असफलताओं, तानों और एक ऐसे पल से जुड़ी है, जब घर में मिठाई तो बंट गई, लेकिन अंतिम सूची में उनका नाम नहीं था.

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Reepu Kumari

नई दिल्ली: सरकारी नौकरी की तैयारी करने वाले युवाओं के लिए परीक्षा में असफल होना कोई नई बात नहीं है, लेकिन हर असफलता के बाद खुद को दोबारा खड़ा करना आसान नहीं होता. विशाल तिवारी की कहानी इसी हिम्मत की मिसाल है. उन्होंने अलग अलग परीक्षाओं में सफलता पाने की कोशिश की, लेकिन कई बार निराशा हाथ लगी. एक समय ऐसा भी आया, जब उत्तर प्रदेश सब इंस्पेक्टर की परीक्षा को लेकर परिवार में मिठाई बंट गई, लेकिन अंतिम सूची में उनका नाम नहीं था.

इस घटना के बाद उन्हें लोगों के ताने और हंसी का सामना करना पड़ा. लगातार कोशिशों के बीच उन्हें 13 बार असफलता मिली. इसी दौरान कंधे में चोट लगने के कारण उन्हें डिफेंस की तैयारी भी छोड़नी पड़ी. हालात मुश्किल थे, लेकिन उन्होंने सरकारी नौकरी पाने का सपना नहीं छोड़ा. इसके बाद उन्होंने SSC CGL की तैयारी पर अपना पूरा ध्यान केंद्रित किया और लगातार अपनी रणनीति में बदलाव करते रहे.

डॉक्टर की सलाह के बाद बदली तैयारी की पूरी दिशा

विशाल एक साधारण परिवार से आते हैं. उनके माता पिता चाहते थे कि वह डॉक्टर बनें. उन्होंने NEET की परीक्षा दी और इसके लिए एक साल का ड्रॉप भी लिया, लेकिन सफलता नहीं मिली. इसके बाद उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से जूलॉजी में ग्रेजुएशन किया. आगे उन्होंने आर्म्ड फोर्सेस में जाने की कोशिश की और CDS तथा AFCAT की परीक्षाएं दीं.


इन परीक्षाओं में सफलता के बावजूद उन्हें पांच बार SSB इंटरव्यू में असफलता मिली. बाद में कंधे में चोट लगने पर डॉक्टर ने उन्हें डिफेंस की तैयारी छोड़ने की सलाह दी. इस मोड़ ने उनके करियर की दिशा बदल दी. अब उन्होंने सरकारी नौकरी हासिल करने के लिए SSC CGL को अपना लक्ष्य बनाया और तैयारी में जुट गए.

ऑपरेशन टाला, तैयारी जारी रखी और पहली जीत मिली

असफलताओं के बीच विशाल ने हार मानने के बजाय अपनी कमियों पर काम किया. चोट के बावजूद उन्होंने अपना ऑपरेशन टालकर SSC CGL की तैयारी जारी रखने का फैसला किया. वर्ष 2022 में उनकी मेहनत का पहला बड़ा नतीजा सामने आया. उन्होंने SSC CGL में सफलता हासिल की और पोस्टल असिस्टेंट का पद प्राप्त किया.

यह उनके लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि थी, लेकिन उन्होंने तैयारी रोकने के बजाय अपनी गलतियों को समझना शुरू किया. इस बार उन्होंने अपनी रणनीति में मॉक टेस्ट को ज्यादा जगह दी. उनका मानना था कि परीक्षा की थ्योरी पर वह पहले ही काम कर चुके थे, इसलिए अब ज्यादा से ज्यादा अभ्यास और अपनी गलतियों को पहचानना जरूरी था.

2023 में बदली तस्वीर, हासिल की AIR 74

वर्ष 2023 विशाल के लिए निर्णायक साबित हुआ. उन्होंने लाइब्रेरी में लंबे समय तक पढ़ाई की और मॉक टेस्ट के साथ रिवीजन पर लगातार ध्यान दिया. पिछली असफलताओं से मिली सीख को उन्होंने अपनी तैयारी का हिस्सा बनाया. आखिरकार उनकी मेहनत रंग लाई और SSC CGL में उन्होंने ऑल इंडिया रैंक 74 हासिल की.

इस रैंक के साथ उन्हें मिनिस्ट्री ऑफ एक्सटर्नल अफेयर्स में असिस्टेंट सेक्शन ऑफिसर यानी ASO का पद मिला. जिस सफर में कभी मिठाई बंटने के बाद भी नाम सूची में नहीं आया था, उसी सफर का अंत एक बड़ी सरकारी नौकरी के साथ हुआ. विशाल की कहानी बताती है कि असफलता के बाद की तैयारी कई बार सफलता की दिशा बदल सकती है.