नई दिल्ली: बीमार कर्मचारियों को छुट्टी देने में जर्मनी दुनिया के उदार देशों में गिना जाता है. यहां बीमारी की छुट्टी के दौरान छह सप्ताह तक कर्मचारी को सामान्य वेतन मिलता है. इसके बाद स्वास्थ्य बीमा से सहायता जारी रहती है. कोरोना महामारी के बाद लंबे समय तक रहने वाली बीमारी ने इस व्यवस्था की अहमियत बढ़ाई है. सवाल है कि क्या पेड सिक लीव से लोग गलत फायदा उठाते हैं, या इससे कर्मचारी स्वस्थ होकर बेहतर काम करते हैं.
दुनिया के कई देशों में बीमारी के दौरान कर्मचारियों की आय सुरक्षित रखने के लिए अलग-अलग नियम हैं. कोरोना के बाद लंबे समय तक बीमारी से जूझने वाले लोगों के लिए यह व्यवस्था और महत्वपूर्ण हुई है. आर्थिक सहयोग और विकास संगठन के अनुसार कई देशों ने लंबे समय तक चलने वाली कोरोना बीमारी के लिए बीमारी संबंधी सहायता की व्यवस्था की है. जर्मनी, बेल्जियम, लक्जमबर्ग और स्विट्जरलैंड ऐसे देशों में शामिल हैं.
जर्मनी में कर्मचारी बीमार होने पर अपने नियोक्ता को तुरंत सूचना देता है. आम तौर पर तीन दिन से ज्यादा अनुपस्थित रहने पर चिकित्सकीय प्रमाण देना पड़ता है, हालांकि कंपनी पहले दिन से भी प्रमाण मांग सकती है.
सबसे अहम बात यह है कि बीमारी के कारण काम करने में असमर्थ कर्मचारी को शुरुआती छह सप्ताह तक सामान्य वेतन मिलता है. छह सप्ताह के बाद स्वास्थ्य बीमा संस्था की ओर से बीमारी भत्ता मिलने लगता है.
यह सवाल लंबे समय से बहस का विषय रहा है. आम धारणा होती है कि अगर बीमारी की छुट्टी आसानी से मिलेगी तो कुछ कर्मचारी उसका गलत इस्तेमाल कर सकते हैं. लेकिन केवल छुट्टी की सुविधा को ही कर्मचारियों के अधिक अनुपस्थित रहने का कारण मानना सही नहीं होगा. कई बार बीमारी के बावजूद काम पर लौटना ज्यादा नुकसानदेह साबित होता है. कर्मचारी पूरी तरह स्वस्थ हुए बिना कार्यालय पहुंचता है तो काम की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है. साथ ही बीमारी दोबारा बढ़ने का खतरा भी रहता है.
जापान में काम के प्रति बेहद कठोर संस्कृति के कारण लंबे समय तक काम करने की समस्या चर्चा में रही है. वहां ज्यादा काम के कारण मौत के लिए एक अलग शब्द भी प्रचलित हुआ. सरकार को कर्मचारियों के काम के बोझ को कम करने और छुट्टी लेने को बढ़ावा देने के लिए कदम उठाने पड़े. जापान में सामान्य छोटी बीमारी के लिए जर्मनी जैसी व्यवस्था नहीं है. लंबे समय तक बीमारी या चोट की स्थिति में सहायता मिलने की व्यवस्था अलग नियमों के तहत संचालित होती है.
बीमारी के दौरान कर्मचारियों को सुरक्षा देने के मामले में यूरोप के कई देशों की व्यवस्था मजबूत है. फ्रांस में भी बीमारी और लंबे समय तक चलने वाले स्वास्थ्य संकट से जूझ रहे लोगों के लिए सहायता की व्यवस्था मौजूद है. वहां लंबे समय तक रहने वाली कोरोना बीमारी के मामलों में चिकित्सकीय आधार पर लंबी बीमारी छुट्टी मिल सकती है.
बीमारी की सूचना नियोक्ता को देना जरूरी है.
जरूरत पड़ने पर चिकित्सकीय प्रमाण देना होता है.
शुरुआती छह सप्ताह तक वेतन जारी रहता है.
इसके बाद स्वास्थ्य बीमा से बीमारी भत्ता मिल सकता है.
ज्यादा बीमारी छुट्टी मिलने का मतलब यह नहीं है कि कर्मचारी काम से भाग रहा है. सही व्यवस्था का उद्देश्य कर्मचारी को बीमारी छिपाने या अधूरी सेहत के साथ काम पर आने के बजाय पूरी तरह स्वस्थ होने का मौका देना है. जर्मनी का उदाहरण बताता है कि बीमारी के समय आय की सुरक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था साथ-साथ चल सकती हैं. इसलिए बहस केवल इस बात पर नहीं होनी चाहिए कि कर्मचारी कितने दिन छुट्टी लेता है, बल्कि यह भी देखना जरूरी है कि वह स्वस्थ होकर कितनी अच्छी तरह काम पर लौटता है. हालांकि आंड़कों में भारत का नाम नहीं है.