बड़ी कंपनियां कर रही छटनी, जानिए किस तरह के कर्मचारी पहले आते हैं रडार पर

देश–दुनिया की कई बड़ी कंपनियों में लागत घटाने के लिए छटनी तेज हो रही है. मैनेजमेंट ऐसे कर्मचारियों को पहले निशाने पर लेता है जिनकी परफॉर्मेंस औसत रहती है.

Gemini
Reepu Kumari

नई दिल्ली: बाजार में अनिश्चितता और लागत कम करने के दबाव ने पिछले कुछ महीनों में बड़ी कंपनियों को छटनी का रास्ता अपनाने पर मजबूर किया है. कई सेक्टर इस समय पुनर्गठन के दौर से गुजर रहे हैं, जिससे कर्मचारियों की चिंता बढ़ गई है. कंपनी के भीतर किन कर्मचारियों पर सबसे पहले असर पड़ता है, यह अक्सर समझना मुश्किल होता है.

हालांकि विशेषज्ञ बताते हैं कि कुछ संकेत ऐसे होते हैं जो बताते हैं कि कौन–सी भूमिकाएं और कर्मचारी छटनी के दौरान सबसे पहले रडार पर आते हैं.

टीम में ओवरस्टाफिंग होने पर बढ़ जाता है रिस्क

जब किसी विभाग या टीम में जरूरत से ज्यादा कर्मचारी होते हैं, तो कंपनी सबसे पहले वहां कटौती करती है. कई बार प्रोजेक्ट बदलने या बड़ी डील खत्म होने पर भी स्टाफिंग जरूरतें घट जाती हैं. ऐसे में वे कर्मचारी पहले प्रभावित होते हैं जिनकी भूमिका तुरंत दूसरी टीम में फिट नहीं हो पाती. कंपनियां ऐसे मामलों में लचीले और मल्टी-स्किल वाले कर्मचारियों को प्राथमिकता देती हैं.

परफॉर्मेंस में लगातार गिरावट हो तो खतरा बढ़ता है

छटनी के दौरान परफॉर्मेंस हमेशा एक निर्णायक फैक्टर होता है. जिन कर्मचारियों के सालाना रिव्यू कमजोर होते हैं या जिन पर सुधार की टिप्पणी बार–बार आती है, वे सबसे पहले सूची में आते हैं. कंपनियां ऐसे कर्मचारियों को बनाए रखने के बजाय उन पर निवेश कम करना चुनती हैं जो बेहतर प्रदर्शन में सक्षम हों.

पुरानी स्किल हों तो होता है नुकसान

टेक्नोलॉजी तेजी से बदल रही है और कंपनियां अब उन लोगों को प्राथमिकता देती हैं जिनके कौशल अपडेटेड हों. जिन कर्मचारियों ने लंबे समय से अपनी स्किल अपग्रेड नहीं की है, वे छटनी की संभावित सूची में पहले जोड़े जाते हैं. नई तकनीकों को अपनाने में धीमे लोग अधिक जोखिम में रहते हैं.

नई रणनीति में फिट न बैठने वाली भूमिकाएं निशाने पर

कंपनियां जब नई बिजनेस रणनीतियां बनाती हैं, तो वे तय करती हैं कि किन भूमिकाओं की भविष्य में जरूरत नहीं होगी. ऐसे विभाग, खासकर सपोर्ट फंक्शन, जहां ऑटोमेशन संभव हो, सबसे पहले प्रभावित होते हैं. इससे कई बार अच्छी परफॉर्मेंस वाले कर्मचारी भी रिस्क में आ जाते हैं.

लंबे समय से प्रमोशन न मिलने वाले कर्मचारी भी आते हैं रडार पर

जिन कर्मचारियों की ग्रोथ लंबे समय से रुकी होती है, उनके लिए जोखिम बढ़ जाता है. मैनेजमेंट अक्सर ऐसे कर्मचारियों को समझता है कि वे कंपनी की भविष्य की दिशा में ज्यादा योगदान नहीं दे पाएंगे. ऐसे में संगठन लागत बचत के लिए इन्हें प्राथमिकता से चुन सकता है.

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