ये है भारत का सबसे पुराना Co-Ed बोर्डिंग स्कूल, 1847 में ही लड़के-लड़कियां साथ पढ़ने लगे थे; क्या आप जानते हैं इसका नाम?

भारत में कई ऐतिहासिक शिक्षण संस्थान हैं, लेकिन एक बोर्डिंग स्कूल ऐसा भी है जिसने 1847 में ही सह-शिक्षा की शुरुआत कर दी थी. आज भी यह संस्थान अपनी समृद्ध विरासत, अनुशासन और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए जाना जाता है.

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Reepu Kumari

नई दिल्ली: अगर आप सामान्य ज्ञान और भारत के ऐतिहासिक शिक्षण संस्थानों में रुचि रखते हैं, तो यह जानकारी आपके लिए खास है. देश में एक ऐसा बोर्डिंग स्कूल मौजूद है, जिसने लगभग 179 साल पहले ही लड़कों और लड़कियों को साथ पढ़ाने की शुरुआत कर दी थी. उस दौर में यह कदम बेहद अलग और प्रगतिशील माना जाता था. आज भी यह संस्थान अपनी शिक्षा, अनुशासन और समृद्ध विरासत के लिए देशभर में प्रसिद्ध है. हिमाचल प्रदेश की पहाड़ियों के बीच स्थित यह स्कूल न केवल भारत का सबसे पुराना सह-शिक्षा वाला बोर्डिंग स्कूल माना जाता है, बल्कि दुनिया के सबसे पुराने लगातार संचालित बोर्डिंग स्कूलों में भी अपनी पहचान बनाए हुए है.

यहीं से हुई थी सह-शिक्षा की शुरुआत

भारत का सबसे पुराना सह-शिक्षा वाला बोर्डिंग स्कूल द लॉरेंस स्कूल, सनावर है. इसकी स्थापना 15 अप्रैल 1847 को हुई थी. यह हिमाचल प्रदेश के कसौली के पास सनावर में स्थित है. संस्थान को देश के सबसे पुराने रिहायशी स्कूलों में गिना जाता है और इसकी ऐतिहासिक विरासत आज भी बरकरार है.

पहली ही कक्षा में लड़के और लड़कियां साथ पढ़े

स्कूल की शुरुआत से ही सह-शिक्षा प्रणाली अपनाई गई थी. पहले बैच में कुल 14 छात्र थे, जिनमें 7 लड़के और 7 लड़कियां शामिल थीं. उस समय अधिकांश स्कूल केवल लड़कों के लिए होते थे, लेकिन इस संस्थान ने शुरुआत से ही दोनों को समान अवसर देने की परंपरा शुरू की, जो आज भी जारी है.


प्राकृतिक वातावरण इसकी खास पहचान

द लॉरेंस स्कूल, सनावर समुद्र तल से करीब 1,750 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है. लगभग 130 एकड़ में फैले परिसर के चारों ओर देवदार, चीड़ और ओक के घने जंगल हैं. शांत और प्राकृतिक वातावरण को छात्रों के अध्ययन और व्यक्तित्व विकास के लिए अनुकूल माना जाता है.

ब्रिटिश काल में हुई थी स्थापना

इस स्कूल की स्थापना ब्रिटिश शासन के दौरान सर हेनरी लॉरेंस और लेडी गोनोरिया लॉरेंस ने की थी. शुरुआती समय में यहां भारत में तैनात ब्रिटिश सैनिकों के बच्चों को शिक्षा दी जाती थी. समय के साथ यह संस्थान देश के प्रतिष्ठित बोर्डिंग स्कूलों में शामिल हो गया.

कई प्रसिद्ध हस्तियां रह चुकी हैं छात्र

यह स्कूल सीबीएसई से संबद्ध है और यहां प्राथमिक कक्षा से लेकर 12वीं तक पढ़ाई होती है. पढ़ाई के साथ खेल, संगीत, कला और एडवेंचर गतिविधियों पर भी विशेष जोर दिया जाता है. स्कूल के पूर्व छात्रों में भूटान की महारानी जेत्सुन पेमा, अभिनेता संजय दत्त, पूर्व केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी और परमवीर चक्र विजेता अरुण खेतरपाल जैसे कई प्रमुख नाम शामिल हैं. संस्थान का आदर्श वाक्य 'Never Give In' है, जो छात्रों को हर परिस्थिति में दृढ़ता और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है.