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लंगूर की आवाज निकालें और जॉब पाएं, दिल्ली में बंदरों को भगाने के लिए सरकार ने निकाली वेकेंसी; यहां जानें डिटेल

दिल्ली विधानसभा परिसर में बार-बार बंदरों के घुसने की समस्या को हल करने के लिए प्रशासन ने एक अनोखा कदम उठाया है.

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Edited By: Reepu Kumari
लंगूर की आवाज निकालें और जॉब पाएं, दिल्ली में बंदरों को भगाने के लिए सरकार ने निकाली वेकेंसी; यहां जानें डिटेल
Courtesy: GEMINI

दिल्ली विधानसभा परिसर में बंदरों की बढ़ती हरकतें अब प्रशासन के लिए बड़ी समस्या बन चुकी हैं. बिजली के तारों, डिश एंटेना और संरचना को नुकसान पहुंचाते बंदर विधायकों, कर्मचारियों और आगंतुकों की सुरक्षा के लिए खतरा बन रहे हैं. यह चुनौती लगातार बढ़ने पर अधिकारियों ने एक मनमोहक और तकनीकी समाधान निकाला है, जिसके तहत लंगूर की आवाज की नकल करने वाले प्रशिक्षित लोगों को नियुक्त करने का निर्णय लिया गया है.

आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि यह नई योजना बंदरों को मानवीय ढंग से भगाने के उद्देश्य से तैयार की गई है. पुराने तरीकों जैसे कटआउट और जाल के कारगर न होने से यह विचार जन्म लिया है. पीडब्ल्यूडी ने निविदा जारी कर दी है, और चयनित प्रशिक्षित कर्मी 8 घंटे की शिफ्ट में अपना कार्य करेंगे, ताकि बंदरों को सुरक्षित दूरी पर रखा जा सके और परिसर में शांति और सुरक्षा बनी रहे.

बंदरों की समस्या क्यों गंभीर

दिल्ली विधानसभा परिसर में असुरक्षित तारों, डिश एंटेना और दीवारों पर उछलते बंदरों की गतिविधियों से संपत्ति को नुकसान पहुंचने की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं. न सिर्फ भवनों को नुकसान होता है, बल्कि आने-जाने वाले कर्मचारियों और विधायकों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. इस समस्या को देखते हुए प्रशासन ने गैर-आक्रामक समाधान अपनाने का निर्णय लिया है.

लंगूर की आवाज के पीछे विज्ञान

लंगूर बंदरों के प्राकृतिक दुश्मन माने जाते हैं. जंगलों में लंगूरों की गर्जना सुनते ही बंदर भयभीत हो जाते हैं और दूर भागते हैं. इसी प्राकृतिक व्यवहार का लाभ उठाते हुए अब प्रशिक्षित कर्मी लंगूर की आवाज की नकल करेंगे. यह आवाज बंदरों पर मनोवैज्ञानिक असर डालेगी, जिससे वे खुद ही दूर भागेंगे और आसपास उत्पन्न परेशानी कम होगी.

नियुक्ति प्रक्रिया और शिफ्ट

लोक निर्माण विभाग (PWD) ने निविदा जारी कर दी है ताकि लंगूर की आवाज की नकल कर पाने वाले प्रशिक्षित लोगों को नियुक्त किया जा सके. चयनित व्यक्ति 8 घंटे की शिफ्ट में काम करेंगे, जिसमें वे विधानसभा परिसर में बंदरों की गतिविधियों पर नजर रखेंगे और आवश्यकतानुसार आवाज निकालेंगे. यह नियुक्ति कार्यदिवसों के अलावा शनिवार को भी जारी रहेगा, ताकि निरंतर सुरक्षा सुनिश्चित रह सके.

सुरक्षा मानकों का पालन

प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि नियुक्त किए जाने वाले प्रशिक्षित कर्मी केवल आवाज की नकल करेंगे, न कि बंदरों को नुकसान पहुंचाएंगे. संचालन के दौरान उचित उपकरण, अनुशासन और सुरक्षा मानकों का पालन किया जाएगा, जिससे न तो कर्मचारी और न ही बंदर किसी खतरे में पड़ें. यह तरीका मानवता के प्रति सम्मान को बरक़रार रखते हुए समस्या का समाधान प्रस्तुत करता है.

पिछला अनुभव और बजट

दिल्ली विधानसभा ने वर्ष 2022 में भी इसी तरह का टेंडर निकाला था, जिसमें 12.91 लाख रुपये का बजट आवंटित किया गया था और 6 लोगों को नियुक्त करने की योजना बनी थी. उस अनुभव से अब यह योजना और भी संरचित रूप में लागू होने की तैयारी में है. उम्मीद है कि इस बार प्रशिक्षित कर्मियों की नियुक्ति बंदरों की समस्या को काफी हद तक कम करेगी.