Inspiring Journey: किताबें जलाईं, भूखा रखा, फिर भी नहीं टूटीं… 3 बच्चों की मां ऐसे बनीं पुलिस अफसर
केरल की अंसीरा अंची की जिंदगी में शादी के बाद मुश्किलों का दौर शुरू हुआ. पढ़ाई रोकने की कोशिश हुई, फोन तोड़ा गया, किताबें जला दी गईं और घरेलू हिंसा का सामना करना पड़ा.
नई दिल्ली: केरल की अंसीरा अंची की कहानी उन मुश्किल रास्तों की है, जहां हालात बार-बार इंसान की हिम्मत परखते हैं. 18 साल की उम्र में शादी के बाद उनकी पढ़ाई रुक गई और जिंदगी पर कई तरह की पाबंदियां लग गईं. जिस पढ़ाई को वह आगे बढ़ने का रास्ता मानती थीं, वही उनके लिए संघर्ष की वजह बन गई. फोन तोड़ा गया, किताबें जलाई गईं और घरेलू हिंसा का सामना करना पड़ा. फिर भी बच्चों के बेहतर भविष्य की उम्मीद ने उन्हें आगे बढ़ने की ताकत दी.
अंसीरा ने अपने एक इंटरव्यू में संघर्ष से सफलता तक की कहानी साझा की, जिसे उन्होंने अपने आधिकारिक इंस्टाग्राम पोस्ट में भी बताया. उन्होंने बताया कि 2011 में जब वह 18 वर्ष की थीं, तब सरकारी कॉलेज में दाखिला लिया था. इसी दौरान शादी का रिश्ता आया और जिंदगी का रास्ता बदल गया.
शादी के बाद पढ़ाई बनी संघर्ष की वजह
ससुराल में समय बीतने के साथ अंसीरा के लिए परिस्थितियां और कठिन होती गईं. पढ़ाई की बात करने पर उनके साथ हिंसा होने लगी. उन्होंने बताया कि उनकी किताबें तक जला दी गईं और बच्चों के साथ भी मारपीट हुई. कई बार उन्हें भोजन के लिए भी परेशान किया गया. नौकरी मिलने के बाद भी घर से बाहर न निकल पाने की धमकी दी जाती थी. आखिरकार हिंसा बढ़ने पर वह बच्चों के साथ माता-पिता के पास लौट आईं और अपनी जिंदगी को दोबारा खड़ा करने का फैसला किया.
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बच्चों के भविष्य ने दिया खुद खड़े होने का हौसला
अंसीरा के दो बच्चे थे और उनकी जरूरतों की जिम्मेदारी भी उनके लिए बड़ी चिंता थी. उन्होंने महसूस किया कि बच्चों को बेहतर जिंदगी देने के लिए उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत होना होगा. इसी दौरान उनके एक रिश्तेदार ने PSC की तैयारी शुरू की थी. उसी से उन्हें पढ़ाई के लिए प्रेरणा मिली और उन्होंने कोचिंग जाना शुरू किया. एक पुराने शिक्षक ने भी उन्हें हिम्मत दी और पढ़ाई जारी रखने के लिए आर्थिक चिंता से ऊपर उठकर अपने लक्ष्य पर ध्यान देने को कहा.
गोद में बच्चे, हाथ में किताब और आंखों में सपना
करीब 25 वर्ष की उम्र में अंसीरा छोटे बच्चे और शिशु को संभालते हुए कोचिंग जाती थीं. दिन की जिम्मेदारियों के बाद रात उनकी पढ़ाई के नाम रहती थी. उन्होंने बताया कि बच्चों के सोने के बाद वह आधी रात तक चुपचाप किताबें पढ़ती थीं. कई बार पढ़ने के लिए सोने का बहाना बनाना पड़ता था. मुश्किल परिस्थितियों में भी वह हर परीक्षा की तैयारी करती रहीं.
5 लाख अभ्यर्थियों के बीच परीक्षा, फिर पूरा किया सपना
अंसीरा ने बताया कि उन्होंने करीब 5 लाख उम्मीदवारों के बीच परीक्षा दी. उस समय वह 12वीं पास थीं, जबकि आसपास MBA और इंजीनियरिंग जैसी डिग्री वाले उम्मीदवार भी थे. तीन बार मां बनने के बाद शारीरिक परीक्षा पास करना उनके लिए बड़ी चुनौती थी, लेकिन उन्होंने इसे भी पार किया. परीक्षा और ट्रेनिंग पूरी करने के बाद वह पुलिस अफसर बनीं.