US Israel Iran War

'रूस ने अमेरिकी एयरबेस की सैटेलाइट तस्वीरें ईरान को दीं’, सऊदी अरब में ईरानी हमले को लेकर जेलेंस्की का बड़ा दावा

जेलेंस्की ने दावा किया कि रूस ने ईरान को सऊदी अरब के प्रिंस सुल्तान एयर बेस की उपग्रह तस्वीरें दीं, जिस पर 26 मार्च को हमला हुआ. रूस ने इन आरोपों से इनकार किया है. इस बात के कोई स्वतंत्र सबूत नहीं हैं. जेलेंस्की खाड़ी देशों से यूक्रेन के लिए समर्थन मांग रहे हैं.

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Kuldeep Sharma

नई दिल्ली: यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने कतर दौरे के दौरान एक चौंकाने वाला आरोप लगाया है. उन्होंने कहा कि रूस ईरान को सऊदी अरब में स्थित अमेरिकी एयर बेस की जानकारी दे रहा है. प्रिंस सुल्तान एयर बेस पर ईरान के हमले से पहले रूसी उपग्रहों ने तीन बार तस्वीरें ली थीं. जेलेंस्की ने दावा किया कि वे इस बात पर 100 प्रतिशत भरोसा करते हैं कि रूस ईरान की मदद कर रहा है. इस आरोप ने मध्य पूर्व में चल रहे तनाव को नया मोड़ दे दिया है.

रूसी उपग्रहों की सक्रियता

जेलेंस्की ने बताया कि 20 मार्च, 23 मार्च और 25 मार्च को रूसी उपग्रहों ने प्रिंस सुल्तान एयर बेस की तस्वीरें खींचीं. यह बेस अमेरिकी और सऊदी सैनिकों का बड़ा ठिकाना है. 26 मार्च को ईरान ने इस बेस पर हमला किया, जिसमें कई अमेरिकी सैनिक घायल हो गए. जेलेंस्की का कहना है कि बार-बार तस्वीरें लेना हमले की तैयारी का संकेत होता है. उन्होंने कहा कि रूस को ईरान की मदद करना अपने हित में है.

दावों पर सबूतों की कमी

जेलेंस्की के इस गंभीर आरोप के बावजूद अभी कोई स्वतंत्र स्रोत इसकी पुष्टि नहीं कर सका है. यूक्रेन की दी गई जानकारी में उपग्रह तस्वीरों का सीधा प्रमाण नहीं दिया गया. रूस ने पहले भी ऐसे आरोपों से इनकार किया है. विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने सैन्य सहयोग की बात मानी, लेकिन खुफिया जानकारी साझा करने से साफ मुकर गए. कुछ पुरानी रिपोर्ट्स में रूस द्वारा ईरान को अमेरिकी ठिकानों की जानकारी देने की चर्चा जरूर हुई थी.

जेलेंस्की की खाड़ी यात्रा का मकसद

जेलेंस्की खाड़ी देशों से यूक्रेन युद्ध के लिए समर्थन जुटाने की कोशिश कर रहे हैं. उन्होंने सऊदी अरब और कतर के साथ समझौते किए हैं. यूक्रेन इन देशों को हवाई सुरक्षा और ड्रोन युद्ध का अनुभव साझा करेगा. बदले में बड़े निवेश मिलेंगे. जेलेंस्की ने कहा कि यूक्रेन ईरानी शाहिद ड्रोन से लड़ने में माहिर है, जिसका रूस अपने युद्ध में इस्तेमाल कर रहा है. वे चिंता जता रहे हैं कि मध्य पूर्व का बढ़ता संघर्ष अमेरिका का ध्यान और हथियार सप्लाई यूक्रेन से हटा सकता है.

वैश्विक गठबंधनों में बदलाव

जेलेंस्की के दावे सही हों या नहीं, लेकिन रूस और ईरान के बीच बढ़ते सहयोग को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. ईरान अमेरिका और उसके सहयोगियों से सीधा टकराव बढ़ा रहा है, जबकि रूस यूक्रेन में अपना युद्ध जारी रखे हुए है. दोनों देशों के हित एक-दूसरे से जुड़ते नजर आ रहे हैं. खाड़ी देश ईरानी मिसाइल और ड्रोन हमलों से बचाव के लिए हथियारों की मांग बढ़ा रहे हैं. इससे वैश्विक स्तर पर नई संरेखण की संभावना मजबूत हो रही है.