'भारत को सबक सिखाने' के लिए गलवान हिंसा का आदेश देने वाले चीनी जनरल झाओ जोंगकी पर गिरी गाज, शी जिनपिंग ने पदों से हटाया
चीन ने गलवान घाटी हिंसा और डोकलम गतिरोध का नेतृत्व करने वाले पूर्व जनरल झाओ जोंगकी को शीर्ष राजनीतिक पदों से हटा दिया है. यह कार्रवाई शी जिनपिंग के सेना में भ्रष्टाचार-विरोधी अभियान के तहत हुई है.
चीन ने अपनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के पूर्व जनरल झाओ जोंगकी को देश की शीर्ष राजनीतिक सलाहकार संस्था CPPCC से हटा दिया है. झाओ ने 2020 में गलवान घाटी की हिंसक झड़प और 2017 में डोकलम गतिरोध के दौरान वेस्टर्न थिएटर कमांड की कमान संभाली थी. अमेरिकी खुफिया रिपोर्टों के अनुसार, झाओ ने ही भारत को "सबक सिखाने" के लिए गलवान में आक्रामक कार्रवाई को हरी झंडी दी थी.
बिना कारण बताए शीर्ष राजनीतिक पदों से बर्खास्तगी
चीनी सलाहकार निकाय ने झाओ जोंगकी को CPPCC की स्थायी समिति के साथ-साथ जातीय एवं धार्मिक मामलों की समिति के उप निदेशक पद से भी निष्कासित कर दिया. बीजिंग की ओर से इस कार्रवाई का कोई स्पष्ट कारण नहीं बताया गया है और न ही औपचारिक जांच की घोषणा की गई है. यह निर्णय ऐसे समय आया है जब शी जिनपिंग पीएलए के शीर्ष सैन्य अधिकारियों के खिलाफ व्यापक सफाई अभियान चला रहे हैं.
डोकलम और गलवान दोनों विवादों में निभाई मुख्य भूमिका
झाओ 2016 से वेस्टर्न थिएटर कमांड के प्रमुख थे, जो तिब्बत और भारत से लगी सीमाओं की निगरानी करता है. उनके कार्यकाल में जून 2017 में 72 दिनों तक चला डोकलम विवाद हुआ. इसके बाद मई 2020 में पूर्वी लद्दाख में भारत-चीन सेनाएं आमने-सामने आईं, जिसके तहत 15 जून को हुई गलवान हिंसा में भारत के 20 जवान शहीद हुए और कई चीनी सैनिक मारे गए थे.
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शी जिनपिंग का सेना में जारी बड़ा सफाई अभियान
झाओ के अलावा जनरल झांग यूशिया और लियू झेनली जैसे वरिष्ठ अधिकारियों को भी अनुशासन उल्लंघन के आरोपों में केंद्रीय सैन्य आयोग से हटाया गया है. राष्ट्रपति शी जिनपिंग द्वारा 2012 से चलाए जा रहे इस अभियान के तहत अब तक दर्जनों शीर्ष सैन्य अधिकारियों को बर्खास्त या गिरफ्तार किया जा चुका है. एक अध्ययन के अनुसार, पीएलए के आधे से अधिक उच्च पदों के अधिकारी इस कार्रवाई से प्रभावित हुए हैं.