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India Daily

वॉशिंगटन के शहीद स्मारक पर भारतीय इंजीनियर ने किया डांस, वीडियो देखकर भड़के पूर्व सैनिक; अब मंडराया डिपोर्टेशन का खतरा

वाशिंगटन डीसी के द्वितीय विश्व युद्ध स्मारक पर भारतीय मूल के मधु राजू का डांस वीडियो वायरल होने से हड़कंप मच गया है. वेटरन्स की नाराजगी और नियमों के उल्लंघन के चलते अब उनका इमिग्रेशन स्टेटस खतरे में है.

KanhaiyaaZee
वॉशिंगटन के शहीद स्मारक पर भारतीय इंजीनियर ने किया डांस, वीडियो देखकर भड़के पूर्व सैनिक; अब मंडराया डिपोर्टेशन का खतरा
Courtesy: X/@DrRepatriator

नई दिल्ली: वाशिंगटन डीसी का नेशनल मॉल क्षेत्र अमेरिकी सैन्य बलिदान का प्रतीक माना जाता है. यहां स्थित द्वितीय विश्व युद्ध स्मारक उन लाखों सैनिकों के सम्मान में बना है, जिन्होंने देश के लिए प्राण न्यौछावर किए. हाल ही में भारतीय मूल के मधु राजू का एक वीडियो वायरल हुआ है, जिसमें वे स्मारक परिसर में एक महिला के साथ डांस कर रहे हैं. इस घटना ने वेटरन्स को आहत किया है और मधु के करियर और वीजा पर संकट खड़ा कर दिया है.

वीडियो वायरल होते ही नेटिजन्स ने इसे स्मारक के प्रति अनादर बताया. लोगों का कहना है कि यह बलिदान की पवित्र जगह है, जहां चुप्पी और श्रद्धा होनी चाहिए न कि सोशल मीडिया कंटेंट बनाने की जगह. एक यूजर ने भारत के युद्ध योगदान का जिक्र करते हुए लिखा कि उनके दादा भी युद्ध में घायल हुए थे. ऐसी हरकतें विदेशों में भारतीयों की छवि खराब करती हैं.

पेशेवर जीवन पर गंभीर असर 

एक सक्रिय कार्यकर्ता ने मधु के नियोक्ता पालो अल्टो नेटवर्क्स को टैग कर दिया, जहां वे क्लाउड नेटवर्क सिक्योरिटी इंजीनियर हैं. विवाद बढ़ने पर उनके डांस स्टूडियो 'एमएडी डलास' की वेबसाइट और सोशल मीडिया पेज हटा दिए गए हैं. मधु ने स्वयं अपने लिंक्डइन और इंस्टाग्राम अकाउंट भी डिलीट कर दिए हैं. जिससे उनकी पेशेवर प्रतिष्ठा को गहरा नुकसान पहुंचा है.

वीजा नियमों की कड़ी जांच 

मधु राजू गैर-इमिग्रेंट वीजा पर अमेरिका में हैं. अमेरिकी कानून के मुताबिक वीजा धारकों द्वारा शांति भंग करने वाली गतिविधियों से उनका स्टेटस प्रभावित हो सकता है. नेशनल पार्क सर्विस के नियम स्मारकों पर गरिमा बनाए रखने पर जोर देते हैं और बिना परमिट गड़बड़ी करना निषिद्ध है. अधिकारी अब उनके वीजा स्टेटस की समीक्षा कर रहे हैं. जिससे उन पर डिपोर्टेशन का खतरा है.

भारतीय समुदाय की मिली-जुली राय 

भारतीय अमेरिकी समुदाय में इस पर राय बंटी हुई है. एक वर्ग इसे पूरी तरह गलत मान रहा है, जबकि दूसरे वर्ग का कहना है कि डिपोर्टेशन की सजा बहुत कड़ी है. मधु राजू ने माफी मांगते हुए कहा कि उनका इरादा किसी को ठेस पहुंचाना नहीं था. लेकिन मामला अब काफी संवेदनशील हो चुका है और लोग विदेश जाने वालों को शिष्टाचार सीखने की सलाह दे रहे हैं.

भविष्य पर लटकी कानूनी तलवार 

मधु राजू फिलहाल अमेरिका में ही हैं. लेकिन उनके भाग्य का फैसला कुछ हफ्तों में होने वाली सुनवाई के बाद होगा. वेटरन्स का आक्रोश कम नहीं हो रहा है, जिससे उन पर कानूनी कार्रवाई का दबाव बढ़ रहा है. यह घटना सबक है कि विदेशों में स्थानीय परंपराओं का ध्यान रखना जरूरी है. सुनवाई के बाद ही तय होगा कि वे अमेरिका में रह पाएंगे या नहीं.