नई दिल्ली: मेक्सिको में ड्रग कार्टेल के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई में जलिस्को न्यू जेनरेशन कार्टेल (सीजेएनजी) का सरगना 'एल मेंचो' मारा गया है. रविवार को टपालपा इलाके में गिरफ्तारी के प्रयास में वह घायल हुआ और मेक्सिको सिटी ले जाते समय उसकी मौत हो गई.
रक्षा मंत्रालय ने इसकी पुष्टि की है. अमेरिका ने जानकारी देने वाले को 15 मिलियन डॉलर का इनाम घोषित किया था. मौत की खबर फैलते ही कार्टेल ने बदले की कार्रवाई शुरू कर दी. दर्जनभर राज्यों में सड़कें जलाई गईं, गाड़ियां जलाकर जाम लगाए गए. ग्वादालाजारा जैसे शहर भूतिया हो गए, स्कूल बंद हो गए. यह कार्रवाई मेक्सिको सरकार की ट्रंप प्रशासन को दिखाई गई सख्ती का हिस्सा मानी जा रही है.
नेमेसियो रुबेन ओसेगुएरा का जन्म 1966 में मिचोआकन राज्य के एक गरीब पहाड़ी गांव में हुआ था. बचपन में एवोकाडो के खेतों में मेहनत की. अमेरिका जाकर हेरोइन की तस्करी में पड़ गया. वहां गिरफ्तार होकर कुछ साल जेल में काटे और फिर निर्वासित होकर मेक्सिको लौटा. वापस आकर पुलिस में नौकरी की, लेकिन जल्द ही मिलेनियो कार्टेल में शामिल हो गया, जो सिनालोआ का सहयोगी था. वहां से उसकी अपराध की दुनिया शुरू हुई.
मिलेनियो कार्टेल पर कब्जे की नाकाम कोशिश के बाद ओसेगुएरा ने अलग रास्ता चुना. उसने सीजेएनजी की नींव रखी और सिनालोआ के खिलाफ खुली जंग छेड़ दी. जलिस्को राज्य में मजबूत जड़ें जमाईं. कार्टेल ने फेंटेनिल सहित भारी मात्रा में ड्रग्स अमेरिका पहुंचाए, जिससे लाखों ओवरडोज मौतें हुईं. सिनालोआ की तस्करी की स्टाइल, जेटास की क्रूरता और स्थानीय मदद को मिलाकर संगठन को ताकतवर बनाया. बहुत कम समय में ही यह मेक्सिको का सबसे खतरनाक कार्टेल बन गया.
एल मेंचो ने सिर काटने, पुलिस हत्याओं और खौफनाक धमकियों से दुश्मनों को दबा दिया. 2015 में छह हफ्तों में दो दर्जन पुलिसकर्मी मारे. 2020 में मेक्सिको सिटी पुलिस प्रमुख पर हमला करवाया. राजनीतिज्ञों को रिश्वत देकर संरक्षण लिया. कोविड में कार्टेल के नाम से राशन बांटकर लोगों का दिल जीता. विशेषज्ञों का कहना है कि वह सरकार से बेहतर विकल्प बनकर उभरा. सोशल मीडिया पर गालियों भरी धमकियां लीक होती रहीं हैं.
एल मेंचो सालों तक पकड़ा ही नहीं गया. पुलिस को रिश्वत देकर उसने अपनी सुरक्षा बनाए रखी. 2015 में सैन्य अभियान के दौरान उसके गुंडों ने आरपीजी से हेलीकॉप्टर गिराया ताकि वह भाग सके. राजनीतिक कवर भी मिला. एल चापो के बाद वह अमेरिका-मेक्सिको की सबसे बड़ी प्राथमिकता था. विशेषज्ञ वांडा फेलब-ब्राउन ने कहा कि उसका इतने साल छिपे रहना हैरान करने वाला है. आखिरकार रविवार की कार्रवाई में उसकी मौत हो गई ई.
एल मेंचो की मौत से कार्टेल ने देशव्यापी हिंसा भड़का दी है. सड़कें जलाईं, शहरों में धुआं उठा. ग्वादालाजारा में लोग घरों में छिपे रहे, सोमवार को कई जगह स्कूल बंद रहे. यह घटना दिखाती है कि कार्टेल का प्रभाव कितना गहरा है. फेंटेनिल तस्करी और अन्य अपराधों का यह सिलसिला रुकने वाला नहीं लगता. मेक्सिको सरकार को अब और मजबूत कदम उठाने होंगे, लेकिन कार्टेल की जड़ें आसानी से नहीं उखड़ेंगी. स्थिति अभी भी तनावपूर्ण बनी हुई है.