व्हाइट हाउस के नीचे 'महाबंकर' की तैयारी! ट्रंप का बड़ा खुलासा- बन रहा है विशाल सैन्य कमांड सेंटर
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खुलासा किया है कि व्हाइट हाउस के बॉलरूम के नीचे एक विशाल अंडरग्राउंड मिलिट्री कॉम्प्लेक्स बनाया जा रहा है. $400 मिलियन के इस प्रोजेक्ट में परमाणु और ड्रोन हमलों से सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम होंगे, जो द्वितीय विश्व युद्ध के पुराने बंकर की जगह लेगा.
नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने व्हाइट हाउस में चल रहे अपने सबसे चर्चित और विवादास्पद 'बॉलरूम प्रोजेक्ट' को लेकर एक चौंकाने वाला खुलासा किया है. राष्ट्रपति ने रविवार को पत्रकारों को जानकारी दी कि जिसे दुनिया अब तक केवल एक भव्य बॉलरूम समझ रही थी, उसके नीचे वास्तव में अमेरिकी सेना एक बेहद विशाल अंडरग्राउंड मिलिट्री कॉम्प्लेक्स का निर्माण कर रही है. यह नया कॉम्प्लेक्स न केवल एक बंकर होगा, बल्कि एक अत्याधुनिक कमांड सेंटर के रूप में भी काम करेगा.
ट्रंप ने एयर फोर्स वन में पत्रकारों से अनौपचारिक बातचीत के दौरान बताया कि इस सैन्य ठिकाने की जानकारी हाल ही में एक 'बेवकूफी भरे' मुकदमे की वजह से सार्वजनिक हो गई. दरअसल, कुछ विरोधियों ने बॉलरूम का निर्माण रोकने के लिए अदालत में याचिका दायर की थी, जिसके चलते इस प्रोजेक्ट के सुरक्षा पहलुओं का खुलासा करना पड़ा. ट्रंप ने कहा, 'सेना बॉलरूम के नीचे एक विशाल कॉम्प्लेक्स बना रही है. इसका निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है और हम इसमें बहुत अच्छा काम कर रहे हैं.'
$400 मिलियन का बजट और 'ईस्ट विंग' का बलिदान
व्हाइट हाउस के इस नए ढांचे को ट्रंप के 'वैनिटी प्रोजेक्ट' के तौर पर देखा जा रहा है, जिसकी अनुमानित लागत करीब 400 मिलियन डॉलर है. इस भव्य निर्माण के लिए व्हाइट हाउस के ऐतिहासिक 'ईस्ट विंग' को पिछले साल अक्टूबर में गिरा दिया गया था. उल्लेखनीय है कि इसी ईस्ट विंग के नीचे द्वितीय विश्व युद्ध के समय राष्ट्रपति फ्रैंकलिन डी रूजवेल्ट ने एक सैन्य बंकर बनवाया था, जिसे प्रेसिडेंशियल इमरजेंसी ऑपरेशंस सेंटर (PEOC) कहा जाता था. नया अंडरग्राउंड कॉम्प्लेक्स अब इसी पुराने बंकर की जगह लेगा.
परमाणु और ड्रोन हमलों से अभेद्य सुरक्षा
बताया जा रहा है कि यह नया कॉम्प्लेक्स किसी भी आधुनिक खतरे से निपटने में सक्षम होगा. राष्ट्रपति के अनुसार, इसके डिजाइन में परमाणु हमले और ड्रोन हमलों से बचने के विशेष इंतजाम किए गए हैं. ऊपरी हिस्सा यानी बॉलरूम खुद एक 'कवर' की तरह काम करेगा, जो पूरी तरह से बुलेट प्रूफ और ड्रोन प्रूफ होगा.
हालांकि, ट्रंप के इस फैसले की तीखी आलोचना भी हो रही है. आलोचकों का तर्क है कि ऐतिहासिक ईस्ट विंग को गिराने जैसा बड़ा फैसला लेने से पहले राष्ट्रपति को संबंधित आयोगों से विधिवत अनुमति लेनी चाहिए थी. फिलहाल, यह प्रोजेक्ट अपनी भव्यता और इसके नीचे छिपे सैन्य रहस्यों के कारण दुनिया भर में चर्चा का विषय बना हुआ है.
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