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मोदी की शपथ में आएंगे 7 पड़ोसी, समझिए हिंद महासागर में कैसे मजबूत होगा भारत

PM Modi Oath Ceremony: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के तीसरे कार्यकाल के शपथ ग्रहण समारोह के लिए विशिष्ट अतिथियों को न्योता भेजा गया है. भारत ने नेबरहुड फर्स्ट पॉलिसी के तहत कई विदेशी मेहमानों को बुलाया है.

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PM Modi Oath
Courtesy: Social Media

PM Modi Oath Ceremony: लोकसभा चुनाव के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी मंत्रिपरिषद का शपथ ग्रहण होना है. शपथ ग्रहण समारोह 9 जून 2024 की शाम को राष्ट्रपति भवन में होगा. इस दौरान भारत ने अपने पड़ोसी देशों के राष्ट्राध्यक्षों को भी इसमें शामिल होने के लिए विशिष्ट अतिथि के रूप में न्योता भेजा है. इस अवसर पर हिंद महासागर क्षेत्र के देशों के नेताओं को खासतौर से आमंत्रित किया गया है. हिंद महासागर भारत की सुरक्षा प्राथमिकताओं में विशेष अहमियत रखता है. इसके अलावा शपथ ग्रहण समारोह में विदेशी नेताओं को बुलाना भारत की पड़ोसी प्रथम नीति को भी प्रदर्शित करता है. 

किन्हें भेजा गया है न्योता? 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शपथ ग्रहण समारोह में श्रीलंका के राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे, मालदीव के प्रेसिडेंट मोहम्मद मुइज्जू, बांग्लादेश की पीएम शेख हसीना और सेशेल्स के वाइस प्रेसिडेंट अहमद अफीक को शामिल होने के लिए न्योता भेजा गया है. इसके अलावा भारत ने मॉरीशस के प्रधानमंत्री प्रविंद कुमार जगन्नाथ, नेपाली पीएम पुष्प कमल दहल प्रचंड और भूटान के पीएम शेरिंग टोबगे को भी निमंत्रण भेजा गया है. यह सभी विशिष्ट अतिथि पीएम मोदी के शपथ ग्रहण समारोह के बाद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा आयोजित भोज कार्यक्रम में भी शामिल होंगे. इन्हें बुलाने के लिए भारत ने भारत ने नेबर फर्स्ट पॉलिसी को ध्यान में रखा गया है. 

क्षेत्रीय हितधारकों को साधने की कोशिश 

रिपोर्ट के मुताबिक, प्रधानमंत्री मोदी के शपथ ग्रहण समारोह में क्षेत्रीय सुरक्षा को प्राथमिकता दी गई है. भारत ने हिंद महासागर क्षेत्र के प्रमुख देशों को भी शपथ ग्रहण समारोह में बुलाया है . मालदीव, श्रीलंका, मॉरीशस, बांग्लादेश जैसे देश हिंद महासागर में विशेष अहमियत रखते हैं. हाल के कुछ महीनों में हिंद महासागर के क्षेत्रीय हितधारकों के साथ भारत के साथ तल्खी भरा माहौल रहा है. मालदीव जिसका अहम उदाहरण है. मालदीव के नए राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू के सत्ता में आने के बाद दोनों देशों के संबंधों में गिरावट आई है. इन देशों पर चीनी प्रभाव ज्यादा है. चीनी विस्तार और उसके प्रभाव को रोकने के लिए  भारत  क्षेत्र की अहम शक्ति है. नई सरकार के शपथ ग्रहण समारोह में पड़ोसी देशों के नेताओं को बुलाकर भारत ने रणनीतिक तौर पर हिंद महासागर के कई हितधारकों को साधने की कोशिश की है. 

चीन की पकड़ हो चुकी मजबूत 

चीन के बेल्ट रोड एंड इनिशएटिव योजना और उसकी मैरीटाइम सिल्क रूट प्रोजेक्ट ने हिंद महासार में अपनी स्थिति बेहद मजबूत कर ली है. चीन की श्रीलंका, मालदीव, बांग्लादेश, म्यांमार जैसे देशों के बंदरगाहों और उनके तटीय इलाकों पर चीन की मौजूदगी बढ़ी है.उसकी ऋण जाल कूटनीति के तहत गरीब देश किस कदर बर्बाद हुए हैं श्रीलंका इसका जीता जागता उदाहरण है. भारत इन देशों को इकट्ठा करके निकट भविष्य में चीनी खतरे को समझाने में कामयाब हो गया तो यह बड़ी कूटनीतिक जीत होगी. जानकारों के मुताबिक, यदि मान भी लिया जाए भारत को कोई बड़ी कामयाबी न मिली तब भी कुछ समान विचारधारा वाले देश भारत के और करीब आ जाएंगे जिससे हिंद महासागर की सुरक्षा रणनीति में बड़े पैमाने पर परिवर्तन देखने को मिल सकता है.