ईरान में और तेज हो सकती है जंग, 2000 मरीन सैनिकों वाला अमेरिकी युद्धपोत मध्य पूर्व की ओर रवाना

अमेरिकी युद्धपोत USS त्रिपोली के मध्य पूर्व की ओर बढ़ने से ईरान संघर्ष नया मोड़ ले सकता है. होर्मुज जलडमरूमध्य और खार्ग द्वीप की सुरक्षा, साथ ही परमाणु खतरा, तनाव बढ़ा रहे हैं.

@Osint613
Sagar Bhardwaj

पिछले तीन हफ्तों से दुनिया की नजरें इस सवाल पर टिकी हैं कि क्या अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान में जमीनी सेना भेजेंगे. उनकी चुप्पी और अस्पष्ट बयानबाजी ने अटकलों को और तेज कर दिया है. इसी बीच, अमेरिकी युद्धपोत USS Tripoli के मध्य पूर्व की ओर बढ़ने की खबर ने हालात को और गंभीर बना दिया है. यह संकेत है कि ईरान संघर्ष अब एक नए और निर्णायक चरण में प्रवेश कर सकता है.

हॉर्मुज का महत्व

हॉर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति का अहम मार्ग है, जहां से लगभग 20% तेल और गैस गुजरती है. युद्ध शुरू होने के बाद ईरान ने यहां जहाजों की आवाजाही लगभग रोक दी है. इससे वैश्विक तेल कीमतों में उछाल आया है. कुछ टैंकरों को ही अनुमति दी गई है, जबकि पश्चिमी देशों के जहाजों को हमले की चेतावनी दी गई है.

अमेरिकी रणनीति

अमेरिका के लिए इस जलमार्ग को फिर से खोलना प्राथमिकता बन गया है. सहयोगी देशों की धीमी प्रतिक्रिया के बीच, USS Tripoli पर तैनात मरीन सैनिक अहम भूमिका निभा सकते हैं. विशेषज्ञों के अनुसार, ईरान के तट पर सीमित सैन्य तैनाती अपेक्षाकृत कम जोखिम भरा विकल्प हो सकता है, जिससे समुद्री मार्ग सुरक्षित किया जा सके.

खार्ग द्वीप का समीकरण

ईरान का खार्ग द्वीप उसकी तेल अर्थव्यवस्था की रीढ़ है, जहां से लगभग 90% निर्यात होता है. हालिया हमलों में इस द्वीप के सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया, लेकिन तेल संरचना को नुकसान नहीं पहुंचाया गया. विश्लेषकों का मानना है कि इस द्वीप पर नियंत्रण अमेरिका के लिए रणनीतिक बढ़त साबित हो सकता है.

परमाणु चिंता और आगे का रास्ता

इस पूरे घटनाक्रम का दूसरा बड़ा पहलू ईरान का समृद्ध यूरेनियम भंडार है. आशंका है कि इसका उपयोग परमाणु हथियार बनाने में हो सकता है. इसे सुरक्षित करने के लिए जमीनी बलों की जरूरत पड़ सकती है. अगर अमेरिका सैनिक भेजता है, तो यह दो दशकों में पहली बड़ी जमीनी कार्रवाई होगी, जो क्षेत्रीय संतुलन बदल सकती है.