क्या अमेरिका ईरान पर हमला करेगा? प्रदर्शनकारियों पर क्रूर कार्रवाई के बीच ट्रंप ने कही मदद की बात
ईरान में बढ़ते जनआंदोलन और हिंसक दमन के बीच अमेरिका सैन्य विकल्पों पर विचार कर रहा है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि हालात बिगड़ने पर अमेरिका हस्तक्षेप कर सकता है.
नई दिल्ली: ईरान में दिसंबर के अंत से शुरू हुए विरोध प्रदर्शन अब देश की सीमाओं से बाहर गूंजने लगे हैं. आर्थिक संकट से उपजा आक्रोश सत्ता के खिलाफ खुली चुनौती बन चुका है. हिंसक कार्रवाई, मौतों और गिरफ्तारियों के बीच अमेरिका की भूमिका पर नजरें टिक गई हैं. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को ईरान के खिलाफ सीमित सैन्य कार्रवाई के विकल्पों पर ब्रीफिंग दी गई है. हालांकि अंतिम फैसला नहीं हुआ है, लेकिन वॉशिंगटन और तेहरान के बीच तनाव अपने चरम पर है.
ईरान में प्रदर्शन क्यों भड़के
28 दिसंबर को ईरान में मुद्रा संकट और बढ़ती महंगाई के खिलाफ प्रदर्शन शुरू हुए. देखते ही देखते ये आंदोलन सत्ता और धार्मिक नेतृत्व के खिलाफ नारेबाजी में बदल गया. इंटरनेट बंद होने के बावजूद प्रदर्शन देशभर में फैल गए. मानवाधिकार संगठनों के अनुसार अब तक कम से कम 72 लोगों की मौत हो चुकी है और 2,300 से ज्यादा लोग हिरासत में लिए गए हैं, जिससे हालात और गंभीर हो गए हैं.
खामेनेई का सख्त रुख
ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने किसी भी तरह की नरमी के संकेत नहीं दिए हैं. सरकारी मीडिया प्रदर्शनकारियों को ‘दंगाई’ और ‘आतंकवादी’ बता रहा है.अटॉर्नी जनरल मोहम्मद मोवाहेदी आजाद ने चेतावनी दी है कि प्रदर्शनकारियों को ‘अल्लाह का दुश्मन’ माना जाएगा, जो ईरानी कानून में मौत की सजा के बराबर अपराध है.
अमेरिका के सैन्य विकल्प
न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रपति ट्रंप को ईरान के खिलाफ नए सैन्य विकल्पों की जानकारी दी गई है. इनमें तेहरान में सुरक्षा प्रतिष्ठानों पर सीमित हमले भी शामिल हैं. हालांकि ट्रंप ने अंतिम फैसला नहीं लिया है, लेकिन उन्होंने साफ कहा है कि अगर दमन और बढ़ा तो अमेरिका कड़ा जवाब देगा. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जमीनी सेना भेजने का कोई इरादा नहीं है.
वैश्विक स्तर पर समर्थन और विरोध
ईरान के अंदर हालात के साथ-साथ विदेशों में भी इसका असर दिख रहा है. लंदन स्थित ईरानी दूतावास पर प्रदर्शन, पेरिस और बर्लिन में रैलियां और वॉशिंगटन में व्हाइट हाउस के बाहर प्रदर्शन हुए. ईरान के पूर्व शाह के बेटे रजा पहलवी ने भी लोगों से सड़कों पर उतरने की अपील की है, जिससे आंदोलन को अंतरराष्ट्रीय समर्थन मिल रहा है.
अमेरिका की रणनीतिक दुविधा
अमेरिकी अधिकारियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती संतुलन बनाए रखने की है. सैन्य कार्रवाई से ईरानी सरकार को कमजोर करना एक लक्ष्य है, लेकिन इससे जनता का समर्थन सत्ता के पक्ष में जाने का खतरा भी है. साथ ही, अमेरिकी ठिकानों और दूतावासों पर जवाबी हमलों की आशंका बनी हुई है. व्हाइट हाउस का कहना है कि अगला कदम इस बात पर निर्भर करेगा कि ईरान अपने लोगों के खिलाफ कितनी दूर तक जाता है.
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