अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ को किया अवैध घोषित, 6-3 के बहुमत से किया रद्द

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को एक ऐसे फैसले लिया जिसका दुनिया भर में असर पड़ सकता है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेशनल इमरजेंसी कानून के तहत लगाए गए बड़े टैरिफ को रद्द कर दिया.

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Ashutosh Rai

US News: अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को एक ऐसे फैसले लिया जिसका दुनिया भर में असर पड़ सकता है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेशनल इमरजेंसी कानून के तहत लगाए गए बड़े टैरिफ को रद्द कर दिया. इससे उनकी सबसे एग्रेसिव इकोनॉमिक पॉलिसी में से एक को बड़ा झटका लगा और ग्लोबल ट्रेड वॉर की दिशा बदल गई, जिसे उन्होंने ऑफिस लौटने के बाद फिर से शुरू किया था.

सुप्रीम कोर्ट ने सुनाया फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि शक्तियों के एक अहम बंटवारे को बनाए रखने के लिए वोटिंग करते हुए टैक्स लगाने का अधिकार कांग्रेस का है, ट्रंप का नहीं. सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को 6-3 से फैसला सुनाया और प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप द्वारा दुनिया पर लगाए गए कुछ इमरजेंसी टैरिफ को खत्म कर दिया. सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि IEEPA राष्ट्रपति को टैरिफ लगाने का असीमित अधिकार नहीं देता. अधिकार क्षेत्र की कमी का हवाला देते हुए कोर्ट ने केस को खारिज करने के निर्देश के साथ वापस भेज दिया है.

चीफ जस्टिस जॉन रॉबर्ट्स का बयान

चीफ जस्टिस जॉन रॉबर्ट्स ने बहुमत की राय लिखते हुए ट्रंप प्रशासन की दलीलों को सिरे से खारिज कर दिया. उन्होंने अपने आदेश में लिखा, "IEEPA के सेक्शन 1702(a)(1)(B) में 16 शब्दों की दूरी पर लिखे गए दो शब्दों 'रेगुलेट' (Regulate) और 'इम्पोर्टेशन' (Importation) के आधार पर राष्ट्रपति किसी भी देश से, किसी भी उत्पाद पर, किसी भी कीमत पर और किसी भी समय के लिए टैरिफ लगाने की स्वतंत्र शक्ति का दावा करते हैं. उन शब्दों का इतना व्यापक अर्थ और महत्व नहीं निकाला जा सकता."

नवंबर की बहस में ही उठ गए थे सवाल

इससे पहले 5 नवंबर को हुई मौखिक बहस के दौरान ही सुप्रीम कोर्ट के जजों ने सरकार के इस कदम पर गहरा संदेह जताया था. जजों ने सॉलिसिटर जनरल जॉन सॉयर से तीखे सवाल किए थे कि आखिर बिना अमेरिकी संसद (कांग्रेस) की मंजूरी और जांच के ग्लोबल ट्रेडिंग पार्टनर्स पर एक समान टैरिफ लगाने के लिए 1977 के IEEPA कानून का इस्तेमाल कैसे किया जा सकता है.

ट्रंप प्रशासन के सामने रिफंड का बड़ा संकट

इस फैसले के बाद ट्रंप प्रशासन को अब एक बड़े आर्थिक संकट (रिफंड) का सामना करना पड़ेगा, जिसे वे गर्मियों से ही टालने की कोशिश कर रहे थे:

छोटे कारोबारियों की बड़ी जीत: अगस्त में अमेरिकी अपील कोर्ट ने भी फैसला सुनाया था कि ट्रंप के ज्यादतर 'रेसिप्रोकल' टैरिफ गैर-कानूनी थे. हालांकि, सुप्रीम कोर्ट के अंतिम फैसले तक रिफंड प्रक्रिया पर रोक लगा दी गई थी.

अब चुकाना होगा पैसा: शुक्रवार को आए इस फैसले के बाद, जिन छोटे बिजनेस मालिकों ने सरकार पर केस किया था. उनकी जीत पक्की हो गई है. अब उन्हें उनका रिफंड मिलेगा.

आगे का रास्ता

छोटे कारोबारियों के लिए रिफंड का रास्ता भले ही साफ हो गया हो, लेकिन बाकी अमेरिकी व्यवसायों और इंटरनेशनल ट्रेडिंग पार्टनर्स के लिए स्थिति अभी भी उलझी हुई है.

ट्रंप का सहारा बनेगा कौन?

ट्रंप प्रशासन टैरिफ लगाने के लिए अन्य अमेरिकी कानूनों का सहारा ले सकता है. हालांकि, इन कानूनों के तहत टैरिफ लगाने के लिए कांग्रेस (अमेरिकी संसद) की सख्त रेगुलेटरी निगरानी से गुजरना होगा. साथ ही प्रशासन को यह भी साबित करना होगा कि विदेशी व्यापारिक पार्टनर्स अमेरिकी व्यापार के खिलाफ भेदभाव कर रहे हैं, जो कि एक बेहद जटिल और लंबी कानूनी प्रक्रिया है.

IEEPA कानून क्या है?

ट्रंप के टैरिफ विवाद के केंद्र में इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) नाम का एक कानून है. यह कानून 1977 में बनाया गया था. इसका मकसद देश के लिए किसी गंभीर खतरे, जैसे युद्ध जैसी स्थिति, किसी विदेशी दुश्मन से बड़ा आर्थिक खतरा, या किसी बहुत ज़्यादा इंटरनेशनल संकट की स्थिति में प्रेसिडेंट को कुछ खास अधिकार देना था.

IEEPA का गलत इस्तेमाल

इन अधिकारों के तहत, प्रेसिडेंट विदेशी लेन-देन पर रोक लगा सकते हैं या उन्हें रेगुलेट कर सकते हैं, या कुछ आर्थिक फैसलों को तुरंत लागू कर सकते हैं. ट्रंप ने टैरिफ लगाने के लिए IEEPA का इस्तेमाल किया.

ट्रंप के खिलाफ 12 राज्यों का मुकदमा

ट्रंप ने पिछले साल अप्रैल इन टैरिफ के ऐलान किए थे। इन टैरिफ के खिलाफ अमेरिका के  12 राज्यों ने मुकदमा दायर किया है. एरिजोना, कोलोराडो, कनेक्टिकट, डेलावेयर, इलिनॉय, मेन, मिनेसोटा, नेवादा, न्यू मेक्सिको, न्यूयॉर्क, ओरेगन और वर्मोंट राज्यों ने छोटे कारोबारियों के साथ मिलकर ट्रंप सरकार के खिलाफ यह केस किया है.

सुप्रीम कोर्ट के फैसले का असर:

  1. ट्रंप के लगाए गए टैरिफ हट जाएंगे.
  2. अमेरिका को कंपनियों को पैसा वापस करना पड़ सकता है.
  3. दुनिया के देशों को अमेरिका में सामान बेचने में राहत मिलेगी.
  4. भारत, चीन और यूरोप के निर्यातकों को फायदा होगा.
  5. कई चीजें सस्ती हो सकती हैं.
  6. शेयर बाजारों में तेजी आ सकती है.
  7. दुनिया का व्यापार ज्यादा स्थिर हो सकता है.

निचली अदालतों ने भी गैर-कानूनी ठहराया

निचली अदालतों ने भी टैरिफ को गैर-कानूनी ठहराया. उन्होंने कहा था कि IEEPA ने टैरिफ लगाने के लिए इतनी बड़ी पावर नहीं दी है. सुप्रीम कोर्ट ने नवंबर 2025 में मौखिक दलीलें सुनीं, जहां जजों ने ट्रंप की दलीलों पर शक जताया. कोर्ट की 6-3 की मेजॉरिटी के बावजूद, जजों ने सवाल उठाया कि क्या प्रेसिडेंट कांग्रेस की मंज़ूरी के बिना इतने बड़े पैमाने पर टैरिफ लगा सकते हैं, क्योंकि टैरिफ टैक्स का एक रूप है और यह कांग्रेस की जिम्मेदारी है.