'अमेरिका हर देश के साथ युद्ध की स्थिति में नहीं', ट्रंप के टैरिफ को अवैध बताते हुए जानें क्या बोला US सुप्रीम कोर्ट
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा लगाए गए व्यापक टैरिफ को असंवैधानिक करार देते हुए रद्द कर दिया है. कोर्ट ने कहा कि राष्ट्रपति के पास आर्थिक आपातकालीन शक्तियों के तहत मनमाने ढंग से वैश्विक शुल्क लगाने का कानूनी अधिकार नहीं है.
डोनाल्ड ट्रंप के कड़े आर्थिक एजेंडे को तगड़ा झटका देते हुए अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने उनके द्वारा लगाए गए वैश्विक शुल्कों को अवैध घोषित कर दिया है. 6-3 के बहुमत से आए इस फैसले में कोर्ट ने स्पष्ट किया कि 'इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट' राष्ट्रपति को एकतरफा टैरिफ लगाने की अनुमति नहीं देता. चीफ जस्टिस जॉन रॉबर्ट्स ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि अमेरिका हर देश के साथ युद्ध की स्थिति में नहीं है. यह फैसला ट्रंप प्रशासन की अब तक की सबसे बड़ी कानूनी हार मानी जा रही है.
संवैधानिक शक्तियों का अतिक्रमण
अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति ने अपनी कार्यकारी शक्तियों का उल्लंघन किया है. ट्रंप ने मेक्सिको, कनाडा और चीन जैसे प्रमुख व्यापारिक भागीदारों पर भारी शुल्क लगाने के लिए आपातकालीन शक्तियों का सहारा लिया था. मुख्य न्यायाधीश जॉन रॉबर्ट्स ने लिखा कि राष्ट्रपति के पास असीमित मात्रा और अवधि के लिए एकतरफा टैरिफ लगाने की शक्ति नहीं है. संविधान के मुताबिक इसके लिए उन्हें कांग्रेस से स्पष्ट अनुमति लेनी चाहिए थी. बिना विधायी समर्थन के ऐसे आर्थिक फैसले लेना पूरी तरह असंवैधानिक है.
ट्रंप ने फैसले को बताया अपमानजनक
इस न्यायिक झटके पर डोनाल्ड ट्रंप ने गहरी नाराजगी व्यक्त करते हुए इसे 'अपमानजनक' करार दिया है. व्हाइट हाउस में आयोजित एक बैठक के दौरान उन्होंने कहा कि उनके पास इन दंडात्मक शुल्कों को प्रभावी रखने के लिए एक 'बैकअप प्लान' तैयार है. हालांकि यह अभी स्पष्ट नहीं है कि उनकी वैकल्पिक योजना क्या होगी लेकिन यह फैसला उनकी दूसरी सरकार के लिए अब तक की सबसे बड़ी कानूनी बाधा माना जा रहा है जिसने उनके व्यापारिक दबाव बनाने के मुख्य हथियार को कानूनी रूप से कुंद कर दिया है.
वैश्विक व्यापार पर गहरा असर
ट्रंप ने टैरिफ को हमेशा एक सौदेबाजी के उपकरण के रूप में इस्तेमाल किया है. ताकि अन्य देशों को अमेरिकी शर्तों पर झुकने के लिए मजबूर किया जा सके. उन्होंने इन शुल्कों को नशीली दवाओं की तस्करी और आव्रजन जैसे जटिल मुद्दों से जोड़ा था. हालांकि, कोर्ट ने कहा कि यदि अमेरिकी संसद का इरादा राष्ट्रपति को ऐसी असाधारण शक्ति देने का होता तो कानून में इसका स्पष्ट उल्लेख किया जाता. इस फैसले से उन अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक भागीदारों को बड़ी राहत मिली है. जो ट्रंप की अनिश्चित नीतियों से लंबे समय से डरे हुए थे.
सुप्रीम कोर्ट का यह निर्णय अमेरिकी शासन व्यवस्था में 'चेक एंड बैलेंस' की मजबूती को दर्शाता है. कंजर्वेटिव बहुमत वाली अदालत ने जिसने पहले कई मामलों में ट्रंप के पक्ष में फैसला दिया था लेकिन इस बार उसने संवैधानिक सीमा रेखा खींच दी. चीफ जस्टिस रॉबर्ट्स का यह तर्क कि व्यापार नीतियों को सैन्य आपातकाल की तरह नहीं चलाया जा सकता. कोर्ट का यह फैसला भविष्य के राष्ट्रपतियों के लिए एक मिसाल बनेगा. यह फैसला सुनिश्चित करता है कि वैश्विक व्यापार प्रणाली किसी व्यक्ति की इच्छा के बजाय स्पष्ट कानूनों और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं के आधार पर संचालित हो.