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India Daily

अमेरिका ने अब पुतिन से लिया पंगा, अटलांटिक महासागर में रूस के झंडे वाले तेल टैंकर को किया जब्त

इस ऑपरेशन का नेतृत्व अमेरिकी होमलैंड सिक्योरिटी विभाग कर रहा है, जबकि अमेरिकी नौसेना और कोस्ट गार्ड ने इसमें अहम भूमिका निभाई.

Sagar
Edited By: Sagar Bhardwaj
अमेरिका ने अब पुतिन से लिया पंगा, अटलांटिक महासागर में रूस के झंडे वाले तेल टैंकर को किया जब्त
Courtesy: @IranObserver0

अमेरिका ने अटलांटिक महासागर में एक रूसी झंडे वाले तेल टैंकर को अपने कब्जे में ले लिया है. अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, यह टैंकर वेनेजुएला से जुड़े प्रतिबंधित तेल कारोबार में शामिल था. इस ऑपरेशन का नेतृत्व अमेरिकी होमलैंड सिक्योरिटी विभाग कर रहा है, जबकि अमेरिकी नौसेना और कोस्ट गार्ड ने इसमें अहम भूमिका निभाई.

वेनेजुएला से जुड़ा है पूरा मामला

जब्त किया गया जहाज पहले Bella 1 नाम से जाना जाता था, जिसे बाद में बदलकर Marinera कर दिया गया. यह टैंकर पिछले महीने वेनेजुएला के पास अमेरिकी कोस्ट गार्ड की नजर में आया था. अमेरिका का आरोप है कि यह जहाज प्रतिबंधों से बचने के लिए नाम और झंडा बदलकर तेल की तस्करी कर रहा था.

अमेरिका की सख्ती से बढ़ा रूस-अमेरिका तनाव

यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब अमेरिका पहले ही वेनेजुएला के तेल निर्यात पर सख्त रोक लगाए हुए है. रूस, जो वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो का समर्थक रहा है, ने इस कार्रवाई पर नाराजगी जताई है. रूसी विदेश मंत्रालय ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुद्र में रूसी जहाज पर अमेरिकी और नाटो सेनाओं की निगरानी जरूरत से ज्यादा है.

तेल और राजनीति की जंग

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में दावा किया था कि वेनेजुएला अमेरिका को करोड़ों बैरल तेल देगा. वेनेजुएला के विशाल तेल भंडार ट्रंप की रणनीति का अहम हिस्सा माने जा रहे हैं. इसी वजह से यह मामला सिर्फ एक जहाज तक सीमित नहीं, बल्कि तेल, राजनीति और वैश्विक ताकतों की टक्कर बन गया है.

और भी जहाज अमेरिकी रडार पर

जानकारी के मुताबिक, वेनेजुएला के पास काम कर रहे कम से कम तीन अन्य तेल टैंकरों ने भी हाल ही में अपना झंडा बदलकर रूस का कर लिया है. अमेरिका का मानना है कि यह सभी जहाज प्रतिबंधों से बचने की कोशिश कर रहे हैं.

आगे क्या होगा?

अमेरिकी साउदर्न कमांड ने साफ किया है कि वह प्रतिबंधित जहाजों पर नजर बनाए हुए है और जरूरत पड़ने पर कार्रवाई करेगा. विशेषज्ञों का कहना है कि इस घटना से अमेरिका-रूस रिश्तों में और तल्खी आ सकती है और वैश्विक तेल बाजार पर भी इसका असर पड़ सकता है.